- स्वास्थ्य सेवाओं और अनुपूरक बजट पर सरकार से जवाब की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही सोमवार को हंगामेदार माहौल में शुरू हुई। सत्र के पहले ही दिन समाजवादी पार्टी के विधायकों ने कोडीन कफ सिरप मामले में आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। विपक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, सरकारी अस्पतालों में अनियमितताओं और अनुपूरक बजट के उद्देश्य पर भी सरकार को घेरा।
सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय ने सदन में कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में सरकारी अस्पतालों की एमआरआई मशीनें या तो खराब हैं या काम ही नहीं कर रही हैं। जांच के नाम पर मरीजों से मनमानी वसूली की जा रही है।
कोडीन सिरप मामले पर कार्रवाई की मांग
माता प्रसाद पांडेय ने कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब दे। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में समाजवादी पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन दोषियों को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप के कारण अब तक एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में तथ्यों के साथ सदन में पूरा जवाब देगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट बिल पर जानकारी
विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने दोनों सदनों को श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट बिल-2025 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विधेयक पहले ही विधानसभा और विधान परिषद से पारित हो चुका है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे अधिनियम के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। इस कानून का उद्देश्य मंदिर की परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए प्रशासन में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है।
अनुपूरक बजट पर होगी चर्चा
माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि संविधान में अनुपूरक अनुदान का प्रावधान है, लेकिन चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि यह बजट किन जरूरतों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि विपक्ष के आरोपों का जवाब शालीनता और तथ्यों के साथ दिया जाए।
