पंकज चौधरी हो सकते हैं UP BJP के अगले अध्यक्ष, पार्षद से सात बार के सांसद तक का ऐसा है सियासी सफर

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उमेश चन्द्र त्रिपाठी

महराजगंज। महाराजगंज के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बन सकते हैं। सूत्रों से यह जानकारी सामने आई है। पंकज चौधरी ओबीसी समाज से आते हैं। लखनऊ! उत्तर प्रदेश में BJP अध्यक्ष के लिए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का नाम चुन लिया गया है। सूत्रों से यह बड़ी जानकारी निकल कर सामने आई है। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी यूपी के महाराजगंज से 7 बार के सांसद हैं। उन्हें यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया जाएगा। पंकज चौधरी यूपी में बीजेपी के बड़े ओबीसी नेता हैं। सूत्रों के अनुसार यूपी BJP अध्यक्ष के नाम की घोषणा परसों होगी। पंकज चौधरी अभी केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री हैं। उनकी गिनती यूपी के शालीन और जमीन से जुड़े बड़े नेताओं में शुमार होती है। पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1989 में गोरखपुर नगर निगम में पार्षद का चुनाव लड़ने से किया था। वो पार्षद का चुनाव में जीते थे। 1989 में ही गोरखपुर से कटकर महाराजगंज अलग जिला बना। जिसके बाद से पंकज चौधरी ने महाराजगंज को अपना राजनीति का केंद्र बनाया। पंकज चौधरी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से पढ़ाई-लिखाई की है। उनकी माता उज्ज्वला चौधरी महाराजगंज जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी है।

पंकज चौधरी की राजनीति की शुरुआत पार्षद के चुनाव से हुई थी। पार्षद का चुनाव जीतने के बाद वो एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए 7 बार के सांसद हैं। पंकज चौधरी ने 1991 में पहली बार महाराजगंज से लोकसभा का चुनाव जीता था। वह अब तक 1996,1998,2004,2014,2019 और 2024 कुल सात बार चुनाव जीत चुके हैं। पंकज चौधरी 1999 में सपा के कुंअर अखिलेश सिंह और 2009 में कांग्रेस के हर्षवर्धन सिंह से चुनाव हारे थे। महाराजगंज संसदीय क्षेत्र से अब तक वह सात बार चुनाव जीतते आए हैं। पंकज चौधरी अभी केंद्र में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भी हैं। वो विगत वर्षों में यूपी में कुर्मी बिरादरी के बड़े नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पंकज चौधरी का सियासी छवि शालीन नेता की है। कुर्मी बिरादरी के साथ-साथ अन्य बिरादरी में इनकी पहचान काफी सक्रिय और कुशल नेता के रूप में लोग करते हैं। पंकज चौधरी का जन्म 20 नवंबर 1964 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। राजनीति में स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक की यात्रा कर चुके हैं। चौधरी कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग है। उनकी संपत्ति 2024 के लोकसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार लगभग 41.90 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। पंकज चौधरी का परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है, जो जमींदार बैकग्राउंड से है। पिता स्वर्गीय भगवती प्रसाद चौधरी वे एक जमींदार थे और परिवार के मुख्य कर्ताधर्ता थे। पंकज चौधरी के बड़े भाई प्रदीप चौधरी 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थे। उसके बाद उनकी माता  उज्ज्वला चौधरी भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहीं और महाराजगंज जिला पंचायत की 2010 तक दो बार अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनका योगदान स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में काफी रहा।

पंकज चौधरी का विवाह 11 जून 1990 को भाग्यश्री चौधरी से हुआ। भाग्यश्री चौधरी सामाजिक कार्यों में आज भी काफी सक्रिय हैं।
पंकज चौधरी के बच्चों में एक पुत्र रोहन चौधरी और एक पुत्री भी है। रोहन चौधरी भी सामाजिक कार्यों में पूरी तरह से सक्रिय हैं। पंकज चौधरी की राजनीतिक यात्रा स्थानीय स्तर से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची है। वे बीजेपी के वफादार सिपाही और कद्दावर नेता माने जाते हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी की मजबूती के लिए जाने जाते हैं। पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय के प्रमुख चेहरे हैं, जो बीजेपी की ओबीसी-केंद्रित रणनीति के मजबूत पीलर हैं। बीजेपी के लिए महत्व पंकज चौधरी पूर्वांचल के कुर्मी वोटों को एकजुट रखते हैं। 2021 कैबिनेट विस्तार में उन्हें केंद्र में वित्त राज्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने कुर्मी असंतोष संतोष गंगवार के विवाद को शांत किया। 2024 में पुनः उन्हें वित्त राज्यमंत्री बनाकर कुर्मी बेस को मजबूत किया गया, खासकर जब लोकसभा में बीजेपी की सीटें घटीं। मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व- मोदी 3.0 में यूपी से 10 मंत्रियों में 4 ओबीसी (2 कुर्मी: चौधरी अनुप्रिया पटेल) शामिल हैं। यह जातिगत संतुलन (3 सवर्ण, 2 दलित, 4 ओबीसी) का हिस्सा है, जो 2027 विधानसभा चुनावों से पहले ओबीसी समुदाय पर फोकस को दिखाता है।

चुनावी प्रभाव- 7 बार महाराजगंज से जीतकर उन्होंने कुर्मी + ओबीसी + सवर्ण समीकरण साधा। 2024 में 11 कुर्मी सांसद चुने गए (3 बीजेपी, 7 एसपी), जो कुर्मी वोटों के ध्रुवीकरण को दिखाता है। चौधरी बीजेपी के कुर्मी चेहरे के रूप में एसपी की पीडीए को काउंटर करने वाले सबसे मजबूत जनाधार वाले नेता हैं। कुर्मी पारंपरिक रूप से कृषक समुदाय है, जो 1990 के दशक से ओबीसी आंदोलन के प्रभाव में आया। पहले कांग्रेस और बीएसपी के साथ जुड़ा रहा, लेकिन 2014 से बीजेपी का कोर वोट बैंक बन गया। बीजेपी ने “सामाजिक न्याय” की रणनीति से गैर-यादव ओबीसी (कुर्मी, लोधी, मौर्य आदि) को एकजुट किया। 2024 लोकसभा चुनावों में कुर्मी वोटों का कुछ हिस्सा एसपी की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति की ओर खिसका, जिससे बीजेपी को नुकसान हुआ। कुर्मी नेताओं ने बीजेपी को मजबूत किया। जैसे स्वतंत्र देव सिंह (पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष, कुर्मी). 2022 विधानसभा चुनावों में कुर्मी समर्थन से बीजेपी ने 255+ सीटें जीतीं। यह समुदाय मुख्य रूप से पूर्वांचल के गोरखपुर-महाराजगंज बेल्ट, अवध और बुंदेलखंड के जिलों जैसे मिर्जापुर, प्रयागराज, जौनपुर आदि में प्रभावशाली है, जहां यह करीब 40-50 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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