रामपुर। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार को एक और कानूनी तगड़ा झटका लगा है। रामपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने आजम के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दो पासपोर्ट रखने के मामले में दोषी ठहराते हुए 7 साल की सश्रम कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किए गए अब्दुल्ला को तुरंत जेल भेज दिया गया।
यह मामला 2019 का है, जब भाजपा के रामपुर शहर विधायक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला के खिलाफ सिविल लाइन्स थाने में एफआईआर दर्ज कराई। आरोप था कि अब्दुल्ला ने दो अलग-अलग जन्मतिथियों (30 सितंबर 1990 और 1 जनवरी 1993) का इस्तेमाल कर दो पासपोर्ट बनवाए। एक पासपोर्ट चुनावी हलफनामे और दूसरे के लिए गलत जन्मतिथि का सहारा लिया गया। कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला माना।
मुकदमा भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं – 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) – के तहत दर्ज हुआ था। साक्ष्य के रूप में बैंक स्टेटमेंट, आयकर विभाग के रिकॉर्ड और शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच हुई। कोर्ट ने कहा कि यह साजिशरत अपराध था, जिसमें पिता आजम खान का भी हाथ था। यह सजा अब्दुल्ला के लिए दूसरा बड़ा झटका है। वे पहले से ही पिता आजम के साथ रामपुर जिला जेल में बंद हैं – दो पैन कार्ड मामले में भी 7 साल की सजा काट रहे हैं। आजम (75 वर्षीय) सपा के संस्थापक सदस्य और 5 बार रामपुर से सांसद रह चुके हैं। सितंबर 2025 में वे 23 महीने जेल काटने के बाद जमानत पर रिहा हुए थे, लेकिन अब फिर जेल की राह। अब्दुल्ला (32 वर्ष) 2017 में स्वार सीट से विधायक चुने गए थे। सपा ने फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है।
आकाश सक्सेना ने फैसले का स्वागत किया, “सच की जीत हुई। आजम परिवार पर दर्ज 111 से ज्यादा केसों में सबूतों की कमी नहीं।” सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अब्दुल्ला की याचिका खारिज कर दी थी। सपा नेता ने कहा, “यह बदले की राजनीति है, अपील करेंगे।”
