- गोमतीनगर के पॉश इलाके में जमकर बरसीं थीं तारिक के ऊपर गोलियां
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। बागपत जेल में मारे गए माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी माने जाने वाले बनारस निवासी मोहम्मद तारिक हत्याकांड के मामले में कातिलों की तलाश में राजधानी लखनऊ की हाईटेक पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी हत्यारे हाथ नहीं लग सके। जिस तरह से असलहों से लैस बदमाशों ने तारिक के ऊपर गोलियों की बौछार की थी तो उस समय भी कानून-व्यवस्था के दावों की कलई खोल दी थी। इस घटना का राजफाश करने के लिए पुलिस के आलाधिकारियों ने दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया और टीमें अपने-अपने स्तर पर चारों दिशाओं में डेरा डाल हत्यारों की तलाश में जुटी, लेकिन आज तक पुलिस हत्यारों की गर्दन तक पहुंचने में नाकाम रही।
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बताया जा रहा है कि नौ साल के भीतर पुलिस की विवेचना कई बार करवटें लीं, लेकिन कुछ दिनों बाद पूरी कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। अब ऐसा लग रहा है कि पुलिस इस सनसनीखेज मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाकर शांत बैठ गई। सनद रहे कि एक दिसंबर 2017 की शाम ग्वारी गांव से कुछ दूरी पर शहीद पथ के पास बदमाशों ने तारिक को उस समय निशाना बनाया था जब वह दुबग्गा जाने के लिए निकाला था।
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद चर्चा में आए ठेकेदार तारिक के घरवालों से पुलिस ने संपर्क किया और पूछा कि क्या तारिक की शादी हुई है तो घरवालों ने साफ मना कर दिया था कि उसकी शादी नहीं हुई है। जबकि पुलिस की जांच-पड़ताल में सामने आया था कि तारिक की शादी एक ताहिरा नाम की लड़की से निकाह हुआ था। बताया जा रहा है कि इतनी भनक लगते ही पुलिस ताहिरा से पूछताछ शुरू की तो बताया कि तारिक और वह कावेरी अपार्टमेंट में साथ रहते थे। पुलिस ने इस मामले में शुरूआती दौर में क़रीब दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर तह तक जाने के लिए गहनता से छानबीन की, लेकिन पुलिस आज तक तारिक हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में नाकाम रही।
