हरितालिका तीज आज जानिए शुभ योग, पूजा विधि और कथा

hartalika teej

राजेन्द्र गुप्ता

हरतालिका तीज एक पावन और भावनात्मक पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। हर साल भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार इस बार 26 अगस्त को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, कई कुंवारी कन्याएं भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। आज के समय में कई पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ यह व्रत रखकर इस पर्व की भावना को और मजबूत बना रहे हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर शिवजी को अपने जीवनसाथी के रूप में प्राप्त किया था। यही कारण है कि यह व्रत स्त्री-शक्ति, श्रद्धा और अटूट प्रेम का प्रतीक बन गया है।

हरतालिका तीज पर बन रहे 4 शुभ योग

हरितालिका तीज पर सर्वार्थ सिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे चार शुभ योग बन रहे हैं। इस व्रत का बहुत महत्व है। परंपरा के अनुसार, हरितालिका तीज का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अखंड सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत उनके पति के लंबे जीवन और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना के साथ रखा जाता है। वहीं, अविवाहित कन्याएं इस व्रत को मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना से करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत की श्रद्धा और निष्ठा से की गई उपासना का फल जरूर मिलता है।

हरतालिका तीज व्रत का पारण कब करें

हरतालिका तीज का पर्व शिव-पार्वती के अलौकिक प्रेम की स्मृति में मनाया जाता है और यह विशेष रूप से स्त्रियों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का पर्व है। इस वर्ष यह व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा और पारण 27 अगस्त को किया जाएगा।

तीज व्रत में रंगों का महत्व

हरितालिका तीज में रंगों का भी विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक शृंगार करती हैं और शुभ रंगों के वस्त्र धारण करती हैं। लाल रंग देवी पार्वती का प्रिय है, जो प्रेम और शक्ति का प्रतीक है। हरा रंग हरियाली और समृद्धि का संकेत देता है, जबकि गुलाबी रंग सौम्यता और आपसी समझ का प्रतीक माना जाता है, विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए जिनके बीच कोई मतभेद हो। इसके विपरीत, काला, नीला, सफेद और क्रीम रंग वर्जित माने जाते हैं।

हरतालिका तीज की  पूजा विधि

हरितालिका तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। इसके बाद साफ-सुथर विशेषकर हरे या फिर रंग के कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर उसपर हरे या लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद स्वयं द्वारा बनाई गई माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की मूर्ति और शिवलिंग स्थापित करें। सबसे पहले विधि-विधान से गणेश जी का पूजा करें और इसके बाद गौरी-शंकर की पूजा-अर्चना करें और भोग अर्पित करें। माता गौरी को 16 शृंगार की सामग्री चढ़ाएं और हरतालिका तीज व्रत कथा सुनें। अंत में आरती करते हुए सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

इस तरह करें शृंगार

पूजा के दौरान माता पार्वती का सोलह श्रृंगार करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले सिंदूर माता को सिंदूर अर्पित करना चाहिए और इसके बाद काजल लगाना चाहिए। अब माता को चूड़ियां चढ़ाएं और लाल चुनरी ओढ़ाएं। अब माता पार्वती को महावर लगाएं और अन्य शृंगार की सामग्री जैसे बिछिया, मेहंदी आदि अर्पित करें।

हरतालिका तीज व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें ऐसा कौन-सा पुण्य मिला, जिससे वे शिव को पति रूप में प्राप्त कर सकीं। इस पर भगवान शिव ने उन्हें उनकी ही तपस्या की स्मृति दिलाई। माता पार्वती ने बचपन से ही शिव को अपने मन में पति रूप में स्वीकार कर लिया था और इसी संकल्प के साथ उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तप किया। उन्होंने जंगल में रहकर पेड़ों के पत्ते खाए, अन्न का त्याग किया और हर मौसम की कठिनाइयों को सहा। उनके इस तप को देखकर उनके पिता, हिमालय राज चिंतित हो उठे। उसी समय नारद ऋषि भगवान विष्णु का रिश्ता लेकर आए, जिसे हिमालय राज ने स्वीकार कर लिया। जब पार्वती जी को यह बताया गया, तो वे अत्यंत दुखी हुईं और अपने मन की बात सखियों से साझा की। उन्होंने कहा कि वे तो पहले ही भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार कर चुकी हैं और किसी और से विवाह नहीं करेंगी। यह सुनकर सखियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें एक गुफा में छुपा दिया। वहीं पार्वती जी ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर शिव जी की आराधना की और रातभर जागरण किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तब से यह व्रत उन महिलाओं द्वारा रखा जाता है जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, और अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने की इच्छा से यह उपवास करती हैं।

 

Spread the love

Mumbai
homeslider Maharastra

IIT बॉम्बे हॉस्टल में बड़ा बदलाव, सीलिंग फैन की जगह लगाए जाएंगे वॉल-माउंटेड फैन

Mumbai: IIT बॉम्बे में B.Tech छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के हॉस्टल कमरों से सीलिंग फैन हटाकर उनकी जगह दीवार पर लगाए जाने वाले वॉल-माउंटेड फैन लगाने का काम शुरू किया गया है। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने […]

Spread the love
Read More
Parivartini Ekadashi
homeslider Politics

परिवर्तिनी एकादशी 2026: आज भगवान विष्णु की करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत विधि

Parivartini Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से पुण्य की […]

Spread the love
Read More
Mumbai
Crime News homeslider Maharastra

IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे मौत मामले में CCTV से सामने आया घटनाक्रम

Mumbai: IIT बॉम्बे के 22 वर्षीय BTech छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के मामले की जांच में CCTV फुटेज अहम कड़ी बनकर सामने आई है। क्राइम ब्रांच की टीम परीक्षा हॉल से लेकर कैंपस और हॉस्टल तक लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य साहिल की मौत से पहले […]

Spread the love
Read More