Exclusive episode-2: आपातकाल (इमरजेंसी) और मेरी यादें: अमरीकी राष्ट्रों में क्या होता आया है ?

के विक्रम राव

सत्ता पर काविज होते ही क्रान्तिकारी शासक प्रतिक्रान्तिकारी बन जाता है और तानाशाह भी। अतः हमने तय यही किया कि सांकेतिक और सूचक वारदातों को अंजाम दिया, जायगो, ताकि गुप्तचर संस्थायें इन्दिरा गांधी को दहशत में डालती रहेंगी कि देश में जनविरोध मुखरित हो रहा है। इसलिए मतदान द्वारा ही उसे कम किया जा सकता है। तो निर्वाचन करायें।

बड़ौदा डाइनामाइट षड़यंत्र केस के हम सत्ताइस अभियुक्त – प्रथम जार्ज फर्नांडिस, द्वितीय मैं (के. विक्रम राव), फिर सांसद वीरेन शाह जो बाद में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने, गांधीवादी प्रभुदास पटवारी जो तमिलनाडु के राज्यपाल बने, आदि पर सीबीआई यह आरोप लगा ही नहीं पाई कि हमारी क्रियाओं से कोई प्राणहानि हुई हो। हम अहिंसक थे।

हालांकि हमलोग जेल कभी भी नहीं जाना चाहते थे। हम तब भूमिगत अखबार निकालना, पोस्टर-पर्चे आदि भेजना, अन्य प्रदेशों के भूमिगत नेताओं को गुजरात में शरण देना आदि करते थे। चूंकि गुजरात में तब कांगे्रस को पराजित कर विधान सभा में जनता मोर्चा की सरकार बनी थी और मोरारजी देसाइ्र के अनुयायी बाबूभाई पटेल मुख्यमंत्री थे तो गुजरात में मीसा अथवा अन्य काले कानून लागू नहीं थे। हालांकि यह सीमित प्रजाशाही बस साल भर तक चली। फिर गुजरात भी देश की मुख्य धारा (तानाशाही वाली) में आ गया।

बहुधा हम भूमिगत कार्यकर्ताओं को मलाल रहता था कि एक लाख के करीब लोग जेल चले गये। यदि वे भूमिगत रहते तो हमारा संघर्ष तीव्र होता। रिहा होने के बाद जनता पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष चन्द्रशेखर से मैंने पूछा भी था कि जेल के बाहर रह कर संघर्ष चलाते। मगर उनका बेबसी भरा उत्तर था कि ‘‘जब सभी नेता कैद हो गये तो आन्दोलन कैसे चलाया जाता और फिर देश में विरोध मुरवर था ही नहीं।’’ हमारे डाइनामाइट केस के साथियों द्वारा संघर्ष जब तेज हुआ तो कुछ कमजोर कड़िया टूट गईं।

Exclusive episode-1: आपातकाल (इमरजेंसी) और मेरी यादें

 

बड़ौदा में तब मै टाइम्स आॅफ इण्डिया का संवाददाता था और भूमिगत संघर्ष का केन्द्र मेरा आवास था। मगर भाण्डा फूट गया और पुलिस ने छापा मारा तथा मैं गिरफ्तार कर लिया गया। हमारा खेल खत्म हो गया। कई पत्रकार साथियों ने मुझसे पूछा कि डाइनामाइट के अतिरिक्त कोई अन्य रास्ता नहीं था। बहस को छोटा करने की मंशा से मैं यही जबाद देता कि सेन्ट्रल एसेम्ब्ली में बम फेंक कर भगत सिंह ने बहरे राष्ट्र को सुनाना चाहा था। डाइनामाइट की गूंज से गूंगे राष्ट्र को हमलोग वाणी देना चाहते थे। हम राजनेता तो थे नहीं कि सत्याग्रह करते और जेल में बैठ जाते। श्रमजीवी पत्रकार थे अतः कुछ तो कारगर कदम लेकर विरोध करना था।

गिरफ्तार होने के पूर्व एक खास जिम्मेदारी मैंने निभाई थी। महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर भूमिगत नेताओं को पिकअप करना, अपनी कार में बैठाकर अहमदाबाद लाना। एक दिन एक व्यक्ति को लाने का जिम्मा था। तब हम सबका नियम था कि नाम नहीं पूछा जाएगा। क्योंकि पुलिस के दबाव में सूचनायें गुप्त न रह पातीं। वह व्यक्ति मुझे परिचित लगा। बुश शर्ट, पैन्ट और काले बालों से पहचानने में देर हुई। फिर याद आया कि अपने विश्वविद्यालय के दिनों में पानदरीबा चैरस्ते पर बने भवन की पहली मंजिल पर भारतीय जनसंघ के प्रादेशिक कार्यालय में मिला करता था। याद आया वे नानाजी देशमुख थे। मगर कर्पूरी ठाकुर को पहचानने में देर नहीं लगी। वहीं गूंजती आवाज़, वही आकर्षक आंखें। सिख वेश में जार्ज फर्नांडिस का तो मैं ड्राइवर ही बन गया था।

Analysis homeslider Raj Dharm UP Uttar Pradesh

पिछली कड़वी यादों को भुला अखिलेश की पश्चिमी यूपी में बड़ी चुनावी रैली की तैयारी

समाजवादी पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव 29 मार्च को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दादरी में समानता भाईचारा रैली के जरिए अपना चुनावी अभियान शुरू करेंगे। यह महज एक रैली नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी राजनीतिक योजना की शुरुआत […]

Read More
Analysis homeslider Raj Dharm UP Uttar Pradesh

गैस किल्लत के वैश्विक संकट से यूपी भी बुरी तरह प्रभावित

उत्तर प्रदेश में इस समय गैस का गंभीर संकट चल रहा है। ईरान और इजरायल के बीच युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे लाखों परिवारों की रसोई प्रभावित हो रही है। संकट की शुरुआत फरवरी के अंत से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रसोई गैस सिलेंडर की कमी शुरू हो […]

Read More
Analysis homeslider

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ में बढ़ती टकराहट, पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आहट

लकड़ी से जलाने पड़ेंगे घर के चूल्हे और बंद होने की कगार पर कई रेस्टोरेंट शादी-विवाह समारोहों पर एक नई आफत, बिटिया का सामान जुटाएं या सिलेंडर ईरान-इजराइल और अमेरिका के कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच विश्व के सबसे अहम […]

Read More