लोकसभा चुनाव में जवानों की मुस्तैदी: एक कदम चल चुकी, छह और हैं बाकी

  • आगामी 26 अप्रैल के बाद पांच और चरणों के मतदान कराने की चुनौती रहेगी शेष

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में इस बार अधिक से अधिक लोगों को घरों से निकलकर उनका मतदान कराने की कवायद सबसे बड़ी है, लेकिन इस मेले की सफलता में अर्धसैनिक बल व पीएसी के जवानों की भूमिका भी बेहद अहम है। दरअसल देश में इस महापर्व के महारथी सात चरणों में होने वाले चुनाव के छठवें चरण में प्रवेश कर चुके हैं। शुक्रवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए वे पोलिंग बूथों पर मुस्तैद हैं।

अब उनके लिए आगामी 26 अप्रैल के बाद पांच और चरणों का मतदान कराने की चुनौती शेष रहेगी। मतदाता की भूमिका इस महापर्व में सबसे बड़ी होने के साथ ही सबसे सहज भी है। वोटर को एक ही दिन कुछ घंटों के लिए घर से निकलकर पोलिंग बूथ की कतार का हिस्सा बनना है। मत डालने के बाद वह मुक्त है। अपनी मर्ज़ी का मालिक भी। वहीं नेताओं के लिए कुछ माह की लगातार मशक्कत उन्हें संसद की सीढ़ी चढ़ने का रास्ता है। असफलता हाथ लगने पर भी चुनाव में मिला जनाधार उनके लिए भविष्य की पूंजी से कम नहीं। ऐसे में चुनाव में लगातार ड्यूटी कर रहे जवानों की बात करें तो उनके लिए मुश्किलें भी कम नहीं।

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार थमा
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार अभियान बुधवार शाम थम गया। इस चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 88 सीटों पर शुक्रवार को मतदान होगा। निर्वाचन आयोग के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दूसरे चरण में मध्य प्रदेश की बैतूल सीट पर भी चुनाव होना था, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार के निधन के बाद अब इस सीट पर चुनाव सात मई को तीसरे चरण में होगा। इन सीटों पर कुल 1206 प्रत्याशी चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रहे हैं। इस चरण में केरल की 20, कर्नाटक की 14, राजस्थान की 13, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की आठ- आठ , मध्य प्रदेश की छह, असम और बिहार की पांच-पांच, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की तीन-तीन और जम्मू-कश्मीर, मणिपुर तथा त्रिपुरा की एक-एक सीट पर मतदान होगा। मत सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक डाले जायेंगे और मतगणना चार जून को होगी।

निर्वाचन आयोग के अनुसार इस चरण के लिये 89 सामान्य पर्यवेक्षक, 53 पुलिस पर्यवेक्षक और 109 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किये गये हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की जीत की संभावनाओं को मजबूत करने के लिये कई रैली और रोड शो किये। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, केंद्रीय मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी सक्रिय रूप से प्रचार किया। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा तथा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने जमकर चुनाव प्रचार किया। कांग्रेस अध्यक्ष एम मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी , प्रियंका गांधी , कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उप-मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी तथा पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी जोर-शोर से चुनाव प्रचार किया।

दूसरे चरण की हाई प्रोफाइल सीटों में जहां वायनाड से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अग्नि परीक्षा होगी, वहीं तीन केंद्रीय मंत्री और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। राजस्थान के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्रों के भाग्य का फैसला भी जनता 26 अप्रैल को ही तय करेगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को टिकट दिया है। कर्नाटक की मान्ड्या लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की साख दांव पर है। श्री कुमारस्वामी की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) का भाजपा के साथ गठबंधन हैं। केरल की तिरुअनंतपुरम सीट भी चर्चा में है, जहां से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर से है। राजस्थान की जोधपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा से तीसरी बार चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रहे हैं। मथुरा सीट से हेमा मालिनी और मेरठ सीट से धारावाहिक रामायण का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। भाजपा के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या की साख बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट पर दांव पर लगी है। तेजस्वी ने पिछला चुनाव इसी सीट से जीता था। कांग्रेस ने यहां सौम्या रेड्डी को टिकट दिया है। बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट शुरुआत से ही चर्चा में रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने यहां बीमा भारती को उतारा है। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव इस सीट पर कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन गठबंधन सहयोगी राजद ने कांग्रेस को यह सीट नहीं दी। अब पप्पू यादव इसी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।

गौरतलब है कि लोक सभा के पहले चरण के चुनाव में 16.63 करोड़ मतदाताओं ने केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, किरेन रिजिजू, अर्जुन राम मेघवाल सहित कुल आठ केन्द्रीय मंत्रियों, दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और एक पूर्व राज्यपाल सहित 1605 प्रत्याशियों के चुनावी भविष्य का फैसला तय किया था। पहले चरण में 102 सीटों पर औसतन 62 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था।

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