रसुवा की भीषण आपदा से नेपाल में भारी तबाही

Kathmandu
  • हरिचरण शाह ने जलवायु परिवर्तन और हिमालयी झीलों पर जताई चिंता
  • कैलाश यात्रियों की सुरक्षा और सीमापार अलर्ट सिस्टम पर उठे सवाल
  • बोले-समय पर सूचना मिलने से बचाई जा सकती हैं कई जानें

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

Kathmandu: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षा, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर नेपाली जनता दल के पूर्व सांसद हरिचरण शाह ने “नया लुक” संवाददाता उमेश चन्द्र त्रिपाठी को दिए गए इंटरव्यू में आपदा की भयावहता, जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव और हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियरों तथा झीलों से जुड़े खतरों पर अपनी बात रखी।

हरिचरण शाह ने कहा कि रसुवा में आई आपदा का प्रभाव केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चीन से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों, व्यापारिक गतिविधियों और आवागमन पर भी असर पड़ा। उन्होंने कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, आपदा के दौरान कुछ लोगों का अपने परिजनों से संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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कुछ ही मिनटों में मची तबाही, पूर्व चेतावनी पर जोर

पूर्व सांसद हरिचरण शाह ने इंटरव्यू में कहा कि आपदा इतनी तेजी से आई कि लोगों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। उन्होंने आधुनिक सूचना तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यदि खतरे की सूचना समय रहते संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाए, तो कई लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री को सुबह सूचना मिलने और उसके बाद संदेश प्रसारित किए जाने का भी उल्लेख किया। हालांकि, उनके बताए गए समय और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकती हैं हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियां

हरिचरण शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ की संरचना में बदलाव और तापमान बढ़ने जैसी परिस्थितियां भविष्य में गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ग्लेशियरों से बनी झीलों के टूटने की स्थिति में निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है। ऐसी घटनाओं से नेपाल के साथ-साथ भारत और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी जनजीवन, परिवहन और कृषि प्रभावित हो सकते हैं।

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वैज्ञानिकों के अनुसार, रसुवा की अगस्त 2026 की आपदा के शुरुआती आकलनों में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटकर नीचे गिरने की भूमिका सामने आई थी। इस प्रक्रिया से निकली बर्फ, पानी और मलबे ने बाढ़ को विनाशकारी रूप दिया। हालांकि, किसी एक घटना को केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताने के लिए वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।

हिमालयी झीलों पर निगरानी क्यों जरूरी?

पूर्व सांसद ने नेपाल में मौजूद हिमालयी झीलों का जिक्र करते हुए कहा कि संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है। यदि किसी झील में पानी का स्तर तेजी से बढ़ता है या उसके प्राकृतिक बांध के टूटने का खतरा पैदा होता है, तो समय पर चेतावनी से प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने आपदा से बचाव के लिए आधुनिक तकनीक, मौसम संबंधी सूचनाओं, निगरानी प्रणालियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने भी हिमालयी क्षेत्रों में खतरनाक झीलों की निगरानी, जलस्तर मापने वाली प्रणालियों और मोबाइल अलर्ट जैसे उपायों को महत्वपूर्ण बताया है।

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भारत-नेपाल-चीन के लिए साझा चुनौती

हरिचरण शाह ने हिमालय के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां होने वाले बदलावों का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहता। हिमालय से निकलने वाली नदियां, जल संसाधन, वर्षा चक्र और कृषि क्षेत्र पूरे दक्षिण एशिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे से निपटने के लिए भारत, नेपाल और चीन के बीच सूचना साझा करने, वैज्ञानिक निगरानी और आपदा प्रबंधन में सहयोग की जरूरत है। सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों तक समय पर चेतावनी पहुंचाना भी जरूरी है।

आपदा से सबक लेने की जरूरत

रसुवा की घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी और तैयारियों को मजबूत करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। समय रहते जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, ग्लेशियरों और झीलों की निगरानी तथा स्थानीय लोगों और यात्रियों को सतर्क करने की व्यवस्था भविष्य में नुकसान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नेपाली जनता दल के पूर्व सांसद हरिचरण शाह का संदेश है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों को गंभीरता से लेते हुए समय पर सूचना, वैज्ञानिक आकलन और आपसी सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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