
Myanmar म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद यहां पुनर्निर्माण और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने म्यांमार को आधुनिक तकनीकी उपकरणों की दूसरी और अंतिम खेप आधिकारिक तौर पर सौंप दी है। यह सहायता ‘भूकंप राहत और इमारतों के विस्तृत निरीक्षण’ के उद्देश्य से प्रदान की गई है। म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यांगून में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने यह खेप ‘फेडरेशन ऑफ म्यांमार इंजीनियरिंग सोसायटीज’ के अध्यक्ष यू खिन मौंग हते को सौंपी। इससे पहले गत 30 मार्च 2026 को भारत की ओर से इन तकनीकी उपकरणों की पहली खेप सौंपी गई थी। इस अंतिम खेप की आपूर्ति के साथ ही भारत द्वारा इस विशेष अनुदान सहायता पहल के तहत म्यांमार को दिए गए उन्नत इंजीनियरिंग उपकरणों की कुल संख्या अब 357 से अधिक हो गई है।
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भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा भारत द्वारा सौंपे गए इन विशेष उपकरणों में थर्मल इमेजिंग कैमरे, माइक्रोट्रेमर डिवाइस, प्रोफ़ोस्कोप, स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग सेंसर और आरटीके ड्रोन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये उपकरण भूकंप के बाद इमारतों की मजबूती जांचने, संरचनात्मक मूल्यांकन करने, भू-स्थानिक मानचित्रण करने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों को गति देने में बेहद कारगर साबित होंगे। दूतावास के अनुसार इस मदद से म्यांमार की आपदा प्रबंधन और भूकंप तैयारी क्षमताओं में अभूतपूर्व सुधार होगा। इससे न केवल म्यांमार में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए सटीक निर्णय लिए जा सकेंगे, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षात्मक क्षमता का निर्माण भी होगा। यह कदम आपदा प्रबंधन, जोखिम न्यूनीकरण और आपसी सहयोग के क्षेत्र में भारत और म्यांमार की गहरी और स्थायी रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाता है।
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भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत म्यांमार की विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर मदद करता रहा है। संकट के समय तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने से लेकर यहां के बुनियादी ढांचे के विकास तक, भारत हमेशा एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है। भारत ने म्यांमार में स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारा है। आपदा प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों की यह ताज़ा आपूर्ति भी इसी निरंतर सहयोग का हिस्सा है, जो दर्शाता है कि भारत अपने इस पड़ोसी देश की स्थिरता, सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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