क्रिकेट में कई बार मैच का फैसला आखिरी गेंद पर होता है और ऐसी स्थिति में कप्तान की सोच और रणनीति बेहद अहम हो जाती है। हाल ही में खेले गए मुकाबले में गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने अपनी सूझबूझ से टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इस मैच में गुजरात टाइटंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। आखिरी ओवर तक यह तय नहीं था कि जीत किसके हिस्से में जाएगी। जब अंतिम दो गेंदों पर विपक्षी टीम को दो रन की जरूरत थी, तब मैच पूरी तरह खुला हुआ था।
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मैच का टर्निंग पॉइंट पांचवीं गेंद साबित हुई, जब बल्लेबाज ने सिंगल लेने से इनकार कर दिया। इस फैसले ने दबाव को और बढ़ा दिया और यही गलती अंत में भारी पड़ गई। कप्तान शुभमन गिल ने भी माना कि उसी पल उन्हें जीत की उम्मीद जगी। आखिरी गेंद की रणनीति पर गिल ने बताया कि उनके पास दो विकल्प थे—या तो यॉर्कर गेंद डाली जाए या फिर स्लोअर बाउंसर। टीम ने विचार-विमर्श के बाद स्लोअर बाउंसर का विकल्प चुना, क्योंकि इस तरह की गेंद पर बड़े शॉट लगाना मुश्किल होता है।
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गेंदबाज ने योजना के अनुसार गेंद डाली और बल्लेबाज बड़ा शॉट लगाने में असफल रहा। रन लेने की कोशिश में रन आउट हो गया, जिससे मैच गुजरात के पक्ष में चला गया। इस जीत में कप्तान गिल की बल्लेबाजी भी अहम रही। उन्होंने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और एक महत्वपूर्ण पारी खेली। इसके अलावा टीम के अन्य बल्लेबाजों ने भी योगदान दिया, जिससे बड़ा स्कोर खड़ा हो सका। यह मैच यह दर्शाता है कि क्रिकेट में छोटी-छोटी रणनीतियां भी बड़ा फर्क डाल सकती हैं। सही समय पर सही फैसला ही जीत और हार के बीच का अंतर बनता है।
