अगर आपको लगता था कि सीजफायर के बाद कच्चा तेल सस्ता हो जाएगा, तो यह खबर आपको चौंका सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड और WTI में लगभग 3% तक की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब बाजार को राहत की उम्मीद थी। लेकिन हकीकत यह है कि मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
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हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ है, लेकिन निवेशकों को इसकी स्थिरता पर भरोसा नहीं है। इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया का एक प्रमुख तेल मार्ग है और यहां से सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट पूरे बाजार को प्रभावित कर सकती है। इसी डर की वजह से कीमतों में तेजी बनी हुई है।
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इसके अलावा शिपिंग और बीमा से जुड़ी दिक्कतें भी सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं। कंपनियां अभी पूरी तरह से जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या तेल की कीमतें आगे और बढ़ेंगी? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में हालात पूरी तरह शांत नहीं होते, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। बिना पूरी जानकारी के निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
