इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष पर बुधवार से अस्थायी विराम लग गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान करते हुए इसे अपनी “पूर्ण जीत” बताया, जबकि ईरान ने इसे अमेरिका की हार और अपनी कूटनीतिक जीत करार दिया। ईरान का दावा है कि उसकी सभी प्रमुख शर्तें मान ली गईं, वहीं ईरानी मीडिया इसे अमेरिका का “सरेंडर” बता रहा है।हालांकि, जश्न और दावों के बीच सच्चाई यह है कि इस जंग में दोनों पक्षों को भारी मानवीय, सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
ईरान को हुआ बड़ा नुकसान
- युद्ध के दौरान ईरान में 2,000 से लेकर 7,300 तक मौतों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
- करीब 20,000 से 26,000 लोग घायल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक और बच्चे शामिल हैं।
- ईरान की शीर्ष सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व को भारी झटका
- 40 से 250 तक वरिष्ठ कमांडर और अधिकारी मारे जाने के दावे
- मिसाइल और ड्रोन क्षमता में 80-90% तक गिरावट का अमेरिकी दावा
- एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, सैन्य ठिकाने और हथियार फैक्ट्रियां तबाहये भी पढ़ें
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आर्थिक और ढांचागत नुकसान
- तेल सुविधाएं, परमाणु साइट्स और बुनियादी ढांचे को भारी क्षति
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से राजस्व पर बड़ा असर
- लाखों लोग विस्थापित, पर्यावरणीय नुकसान (तेल रिसाव)
- परमाणु ठिकानों पर कई बार हमले
अमेरिका-इजरायल और मिडिल ईस्ट को नुकसान
- 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत, 300-700 घायल
- इजरायल के कई सैन्य और सरकारी ठिकाने निशाने पर
मिडिल ईस्ट के कई देशों को अप्रत्यक्ष नुकसान
- अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण नष्ट
- F-15E, F-35, A-10 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त
- 17 से ज्यादा MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट
- रिफ्यूलिंग टैंकर, हेलीकॉप्टर और AWACS सिस्टम को नुकसान
- मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 17 सैन्य ठिकाने प्रभावित
आर्थिक नुकसान
शुरुआती 12 दिनों में ही 16.5 बिलियन डॉलर तक नुकसान का दावा
“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में महंगी मिसाइलों और हथियारों का भारी खर्च
वैश्विक असर
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- यूरोप समेत कई क्षेत्रों में ऊर्जा संकट गहराया
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक व्यापार प्रभावित
- दुनिया की अर्थव्यवस्था को सैकड़ों अरब डॉलर का अप्रत्यक्ष नुकसान
