सीजफायर के बाद चीन की रणनीति: शांति वार्ता और होर्मुज सुरक्षा पर जोर

नया लुक डेस्क

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच 40 दिन तक चले संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम समझौते पर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन शांति वार्ता और युद्धविराम का समर्थन करता है। उन्होंने पाकिस्तान और अन्य देशों के मध्यस्थ प्रयासों का भी स्वागत किया, लेकिन ईरान के साथ किसी प्रत्यक्ष वार्ता की पुष्टि नहीं की।

चीन की रचनात्मक भूमिका

माओ निंग ने कहा कि चीन मध्य पूर्व में शांति की दिशा में ‘रचनात्मक भूमिका’ निभाएगा। चीन और पाकिस्तान ने पहले पांच सूत्री प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, जिसका उद्देश्य संघर्ष के तुरंत बाद शांति बहाल करना है।

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  • तत्काल शत्रुता का अंत
  • यथाशीघ्र शांति वार्ता की शुरुआत
  • गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा की गारंटी
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता की रक्षा

सीजफायर से चीन को मिलेगा लाभ

सूत्रों के अनुसार, युद्धविराम में चीन की भूमिका अहम रही, और डोनाल्ड ट्रम्प ने भी माना कि चीन ने ईरान को वार्ता के लिए मनाने में मदद की। चीन के लिए यह युद्धविराम आर्थिक रूप से भी लाभकारी है। ईरान का कच्चा तेल चीन का महत्वपूर्ण स्रोत है, और युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने पर चीन को नुकसान हो रहा था। स्टेट ऑफ हॉर्मुज़ में नॉर्मलाइजेशन चीन के व्यापार हित में महत्वपूर्ण है।

चीन की मध्यस्थता का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

तीन साल पहले भी चीन ने सऊदी अरब और ईरान के बीच सुलह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस बार भी चीन की मध्यस्थता से खाड़ी क्षेत्र में नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर पुनर्विचार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। चीन की प्रतिक्रिया ने स्पष्ट किया कि वह न केवल मध्यस्थता के लिए तैयार है, बल्कि ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद क्षेत्रीय स्थिरता और तेल आपूर्ति सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

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