भारतीय शेयर बाजार इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली है। मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब ₹1 लाख करोड़ के शेयर बेच दिए, जिसने बाजार की दिशा ही बदल दी। इतनी बड़ी निकासी यह दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार में जोखिम कम करना चाहते हैं। मार्च 2026 में लगभग 11 अरब डॉलर का आउटफ्लो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक कमजोर हुआ है।
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इस बिकवाली के पीछे सबसे अहम कारण अमेरिका की आर्थिक स्थिति है। वहां बॉन्ड यील्ड में तेजी आने से निवेशकों को सुरक्षित और बेहतर रिटर्न मिलने लगा है। ऐसे में वे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ओर रुख कर रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर डॉलर के हिसाब से कम रिटर्न मिलता है। मार्च में रुपये में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।
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कच्चे तेल की कीमतें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा, कंपनियों के मुनाफे को लेकर भी संशय बना हुआ है। विशेषज्ञों ने कमाई के अनुमान घटा दिए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। हालांकि, बाजार में गिरावट के बाद वैल्यूएशन अब पहले की तुलना में सस्ता हो गया है, लेकिन इसके बावजूद विदेशी निवेशक फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
