भारत सरकार ने एथेनॉल उत्पादन और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भारतीय खाद्य निगम के तहत अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में टूटे चावल (ब्रोकन राइस) की हिस्सेदारी को कम किया जाएगा और इसे एथेनॉल उद्योग की ओर मोड़ा जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 2013 में 1.5% था, जो अब बढ़कर लगभग 20% तक पहुंच चुका है। इस उपलब्धि से देश को 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और कच्चे तेल के आयात में भी भारी कमी आई है। यह जानकारी खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने दी।
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सरकार अब एथेनॉल के उपयोग को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसमें 20% से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग, डीजल में मिश्रण और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इन प्रस्तावों पर जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। टूटे चावल को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। फिलहाल PDS के तहत दिए जाने वाले अनाज में लगभग 25% ब्रोकन राइस शामिल होता है, जिसे अब घटाकर 10% करने की योजना है। इससे बचा हुआ चावल एथेनॉल निर्माताओं, पशु आहार उद्योग और अन्य क्षेत्रों को बेचा जाएगा।
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इस नई व्यवस्था के तहत हर साल 360 से 370 लाख टन अनाज के वितरण में से अतिरिक्त ब्रोकन राइस को बाजार में नीलामी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और एथेनॉल उद्योग को स्थिर कच्चा माल मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम किसानों, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। पहले गन्ने और चावल की कमी के कारण एथेनॉल उत्पादन प्रभावित हुआ था, लेकिन अब टूटे चावल की नियमित आपूर्ति से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
