- ट्रंप के बयान और ईरान के दावे में टकराव
नई दिल्ली/तेहरान। वैश्विक भू-राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसके दो प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमले हुए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर 48 घंटे का अल्टीमेटम और उससे जुड़ी अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी सुर्खियों में है। ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी एक अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, मंगलवार तड़के दो ऊर्जा स्थलों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से एक हमला इस्फ़हान में प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे पर हुआ, जबकि दूसरा खोर्रमशहर स्थित बिजली संयंत्र की गैस पाइपलाइन को प्रभावित करने वाला बताया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
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इस बीच, घटना के पीछे किसी देश या पक्ष की जिम्मेदारी सामने नहीं आई है। न तो अमेरिका और न ही इजरायल की ओर से इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि या जिम्मेदारी ली गई है। आमतौर पर ऐसे संवेदनशील मामलों में कई बार पक्ष सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते हैं। घटनाक्रम से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने माहौल को और गरमा दिया था। ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की समयसीमा बढ़ाने की बात कही थी और संकेत दिए थे कि ऐसा न होने पर ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा सकती है।
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वहीं, ईरान ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “फेक न्यूज” फैलाने वाला बताया है। ईरान का कहना है कि किसी भी तरह की बातचीत या समझौते की बात पूरी तरह निराधार है और ऐसा कोई संवाद नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, को लेकर चल रहे विवाद और बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के दावों और प्रतिदावों के बीच स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है, क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
