महिलाओं के सम्मान के मामले में योगी से काफी पीछे खड़े हैं अखिलेश

Akhilesh Yogi
अजय कुमार

भारतीय जनता पार्टी की मजबूत पकड़ वाले महिला वोट बैंक पर अब समाजवादी पार्टी की नजर लग गई है. पीडीए-पीडीए करते-करते सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रदेश की उन महिलाओं को लुभाने में लग गए हैं, जो अखिलेश यादव के शासनकाल में सबसे ज्यादा डरी सहमी रहती थी. इसी को मुद्दा बनाकर 2017 में बीजेपी ने यूपी में सत्ता हासिल की थी. इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता है कि योगीराज में महिलाएं अपने आप को समाजवादी सरकार के समय से ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं. इस बात का प्रमाण है भाजपा को मिलने वाला महिलाओं का वोट. महिला वोटर खुलकर भाजपा के पक्ष में मतदान करते हैं, इसकी सबसे बड़ी समाजवादी सरकार के समय महिलाओं के साथ हुआ अत्याचार.खैर सुबह का भूला शाम को वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. अब अखिलेश यादव को महिलाओं के सम्मान की चिंता सताने लगी है. लखनऊ में रविवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर जब महिलाओं का सम्मान समारोह शुरू हुआ तो माहौल एकदम अलग था। अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाली सैकड़ों महिलाओं को माला पहनाकर और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सपा अध्यक्ष अखिलेश ने साफ कहा कि अगर 2027 में सपा की सरकार बनी तो नारी समृद्धि सम्मान योजना शुरू होगी और इसके तहत गरीब परिवार की हर महिला को सालाना 40 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाएंगे। साथ ही पुरानी समाजवादी पेंशन योजना को भी नई रूप में बहाल किया जाएगा।

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यह घोषणा महज कोई वादा नहीं बल्कि सपा की नई चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा है जिससे आधी आबादी यानी महिला वोट बैंक को लक्ष्य बनाया गया है। वैसे बता दे इस तरह के दावे सपा प्रमुख अखिलेश यादव पिछले विधानसभा चुनाव में भी कर चुके हैं लेकिन महिला मतदाताओं ने उन पर विश्वास नहीं किया.दरअसल, अखिलेश यादव पिछले कई सालों से सत्ता वापसी की कोशिश में लगे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पीडीए यानी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक फॉर्मूले के जरिए भाजपा को काफी नुकसान पहुंचाया था। अब 2027 के लिए उन्होंने उस फॉर्मूले में एक और अक्षर जोड़ दिया है। वह है ए यानी आधी आबादी। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर लिखा कि पीडीए के साथ ए को जोड़कर महिला सशक्तिकरण को चुनावी एजेंडा बनाया जाएगा। कार्यक्रम में उन्होंने अपनी पुरानी योजनाओं का भी जिक्र किया। 1090 हेल्पलाइन हो या मुलायम सिंह यादव कन्या विद्याधन योजना और रानी लक्ष्मीबाई योजना इन सबको याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि सपा हमेशा महिलाओं की सुरक्षा सम्मान और अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की स्थिति से तय होती है। अगर स्त्रियों की स्थिति की जानकारी हो जाए तो पूरे समाज की तस्वीर साफ हो जाती है।

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कार्यक्रम का नाम रखा गया था मूर्ति देवी मालती देवी महिला सम्मान समारोह। मूर्ति देवी अखिलेश यादव की दादी और मुलायम सिंह यादव की मां थीं जिन्होंने मुलायम सिंह को सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ने का संस्कार दिया। वहीं मालती देवी मुलायम सिंह की पत्नी और अखिलेश की मां थीं जिन्होंने घर संभालकर पति को राजनीति के लिए पूरी आजादी दी। अखिलेश ने इन दोनों विभूतियों को याद करते हुए कहा कि इन्हीं संस्कारों के चलते वह आज इस मुकाम पर हैं, लेकिन सवाल यह है कि महिलाओं का सम्मान करने के लिए उन्हें ऐसी कोई वीरांगना या सामाजिक आंदोलन चलाने वाली क्यों नहीं देखी जो उसके परिवार से इतर हो. सपा सांसद डिंपल यादव ने भी इस मौके पर कहा कि देश को आगे बढ़ना है तो महिलाओं को आगे आना होगा। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी की बेटियां कुछ पीछे छूटती जा रही हैं। अखिलेश ने आगे कहा कि भारत में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। अगर कैमरे अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो सत्ता परिवर्तन अपने आप हो जाएगा। उन्होंने डायल 100 की पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने जानबूझकर वहां महिलाओं को रखा था क्योंकि वे दुख और तकलीफ को बेहतर समझती हैं। आने वाले समय में रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर नई योजना लाकर महिलाओं को और सम्मान दिया जाएगा। बहरहाल इस सच्चाई को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि महिलाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने अखिलेश सरकार के दौरान महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को बड़ा मुद्दा बनाया था। तब एंटी रोमियो स्क्वायड जैसी पहल के साथ योगी सरकार ने इस वर्ग का विश्वास जीता। पिछले सालों में एनकाउंटर और हाफ एनकाउंटर जैसी नीतियों ने अपराधियों पर लगाम लगाई और महिलाओं को भयमुक्त माहौल देने का दावा किया गया। लेकिन अखिलेश अब कह रहे हैं कि मौजूदा समय में महिला उत्पीड़न के मामले बढ़ रहे हैं और पुलिस का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने लखनऊ के ग्रीन कॉरिडोर और दूसरे जिलों में घट रही घटनाओं का भी जिक्र किया जहां पुलिस पर दबाव का आरोप लगाया। उनका तर्क है कि आर्थिक मदद के साथ सुरक्षा का माहौल भी जरूरी है और यही कमी पूरी करने के लिए नारी समृद्धि योजना लाई जा रही है।

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इस घोषणा का असर देखने के लिए बिहार का उदाहरण सामने है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार सरकार ने महिलाओं को 10 हजार रुपये का कारोबार शुरू करने के लिए मदद देने का ऐलान किया। राशि सीधे खातों में पहुंची और महिला वोट बैंक ने एनडीए को बड़ा समर्थन दिया। यूपी में भी योगी सरकार ने बजट में महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं लेकिन अखिलेश ने सीधे नकद 40 हजार रुपये सालाना देने का वादा कर बड़ा दांव खेला है। सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने कहा कि सपा शासन में महिलाएं सुरक्षित रहीं और अब आर्थिक मजबूती से वे और मजबूत होंगी। उनका दावा है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए महिलाएं सपा के साथ तेजी से जुड़ रही हैं।दूसरी ओर भाजपा ने तुरंत पलटवार किया। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा का मतलब ही महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डालना है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से लेकर 2022 तक हर चुनाव में आधी आबादी ने सपा को उखाड़ फेंका। 2024 में कुछ सीटें ज्यादा जीतने का श्रेय धोखे को दिया और कहा कि 2027 में सपा का पूरा सफाया होगा। मौर्य ने आगे कहा कि कोई अपना सुहाग संतान या राखी खतरे में नहीं डालेगा। सपा के पास गुंडे माफिया अपराधी और भ्रष्टाचारियों की पूरी फौज है। इसलिए सपा उत्तर प्रदेश की सुरक्षा के लिए खतरा है। दूसरे उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का हाल वही है जो सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। उनके शासन में बहन बेटियां सहमी हुई थीं और नारा लगता था देख सपाई बिटिया घबराई। बहू बेटियों की आबरू लूटी जाती थी और निकलना दूभर था। वे मुंबई से डांस करने वालियां बुलाते थे और अब महिला सम्मान की बात करते हैं। पाठक ने कहा कि प्रदेश की जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

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यह विवाद यूपी की राजनीति को और तेज कर रहा है। महिला वोट बैंक हमेशा निर्णायक रहा है लेकिन सिर्फ आर्थिक वादा काफी नहीं होता। उनके प्रति नेताओं का व्यवहार भी अहम होता है। सपा को अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलने के लिए और मेहनत करनी होगी। वहीं भाजपा अपनी कानून व्यवस्था और विकास की कहानी को और मजबूत करके पेश कर रही है। अखिलेश की यह योजना अगर लागू होती है तो लाखों गरीब महिलाओं को सीधा फायदा पहुंचेगा। लेकिन बजट का सवाल भी उठेगा। यूपी में करोड़ों महिलाएं हैं और गरीब परिवारों को टारगेट करने पर भी खर्च बड़ा होगा। फिर भी राजनीतिक तौर पर यह दांव सपा को नया जोश दे सकता है। अखिलेश यादव ने कार्यक्रम में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आगे भी बेहतर योजनाएं लाई जाएंगी। हर बच्ची युवती और नारी को सामाजिक आर्थिक रूप से सम्मान देने के लिए स्त्री सम्मान समृद्धि योजना लाई जाएगी। उन्होंने सपा के संकल्प को दोहराया कि प्रदेश की संपूर्ण उन्नति तभी संभव है जब महिलाएं मजबूत हों। इस बीच ओम प्रकाश राजभर जैसे सहयोगी दलों ने भी कटाक्ष किया है कि ना नौ मन गेहूं होई ना राधा नाचेगी। लेकिन सपा का फोकस साफ है। वह महिला वोट को जोड़कर 2027 में वापसी का सपना देख रही है।

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अब सवाल यह है कि यह वादा जमीनी स्तर पर कितना असरदार साबित होगा। महिलाएं न सिर्फ आर्थिक मदद चाहती हैं बल्कि सुरक्षा सम्मान और बेटियों की बेहतर शिक्षा भी चाहती हैं। सपा ने इन सबको जोड़ने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से भी महिलाओं के लिए योजनाएं जारी हैं लेकिन सपा का यह सीधा नकद हस्तांतरण वाला मॉडल नया है। बिहार में कामयाब रहा तो यूपी में भी असर दिख सकता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि कानून व्यवस्था का मुद्दा हमेशा भारी पड़ता है। 2017 में यही मुद्दा सपा की हार का बड़ा कारण बना था। अब 2027 में दोनों पार्टियां इस मोर्चे पर आमने सामने हैं।कार्यक्रम में सम्मानित महिलाओं में खेल शिक्षा चिकित्सा पर्यावरण और किसान क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं शामिल थीं। यह दिखाता है कि सपा हर क्षेत्र की महिलाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश ने कहा कि अगर सत्ता आई तो पहले से बेहतर काम करेंगे। उनकी पार्टी का दावा है कि महिलाएं अब बदलाव चाहती हैं और वोट के जरिए वह बदलाव लाएंगी। दूसरी तरफ भाजपा का तर्क है कि सपा का राजनीतिक सूर्य अस्त हो चुका है और 2047 तक भी उम्मीद नहीं। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की सियासत अब पूरी तरह महिला केंद्रित हो गई है। अखिलेश यादव का यह दांव 2027 के चुनावी मैदान को और रोचक बना रहा है। देखना होगा कि महिला वोट बैंक किसके पक्ष में झुकता है। क्या 40 हजार रुपये का वादा पुरानी यादों को मिटा पाएगा या कानून व्यवस्था की बात फिर भारी पड़ेगी। फिलहाल राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है और दोनों पक्ष अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। यूपी की महिलाएं इस बार तय करेंगी कि किसकी बात पर भरोसा किया जाए।

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