झारखंड: गिरिडीह के जंगल में मिला लिथियम का भंडार

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  • रिचार्जेबल बैटरी में लिथियम का होता है इस्तेमाल

रंजन कुमार सिंह

रांची/गिरिडीह। गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के लोकाय नयनपुर थाना क्षेत्र के असुरहड्डी गांव के जंगल में लिथियम धातु का भंडार पाया गया है। जिससे तिसरी सहित पूरे जिले की अर्थ व्यवस्था फिर से सुधर होने के साथ, माइका का कारोबार बंद होने से, गिरिडीह की खोई चमक फिर से लौटने की उम्मीद है जियोलॉजिकल सर्वे की टीम पिछले कई माह से सर्वे कर रही है। सर्वे के दौरान ही तिसरी के असुरहड्डी जंगल में लिथियम का भंडार पाया गया है। इसकी जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सचिव सह महानिदेशक असित साहा पूरी टीम के साथ दिल्ली से शनिवार को तिसरी प्रखंड के असुरहड्डी गांव के जंगल पहुंचे हैं।

मौके पर तिसरी के सीओ अखिलेश प्रसाद और लोकाय नयनपुर के थाना प्रभारी अमित चौधरी भी उपस्थित थे। इस दौरान भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सचिव असित साहा ने टीम के साथ मिलकर पूरी बारीकी से लिथियम की जांच की और असुरहड्डी गांव के जंगल में मिले लिथियम धातु को दिल्ली ले गए। जहां पर लिथियम परीक्षण लैब में इसकी जांच की जाएगी। जानकारी के अनुसार लिथियम का भंडार मिलने से तिसरी के असुरहड्डी गांव या इससे सटे गांव में बड़ा प्लांट लगाया जाएगा। जिससे पूरा क्षेत्र तो गुलजार होगा ही साथ ही यहां के कई बेरोजगारों को रोजगार मिलने की भी संभावना है। बता दें कि तिसरी के असुरहड्डी गांव के जंगल में अवैध रूप से बैरल व अन्य बेशकीमती स्टोन का उत्खनन होता था। माफिया तत्व के लोग असुरहड्डी गांव के जंगल में अवैध रूप से खदान संचालित कर बैरल, नीलम आदि स्टोन का उत्खनन करवाते थे। इसके बाद चाइना आदि देशों में इसकी तस्करी की जाती थी। इसकी शिकायत केंद्र सरकार तक की गई थी।

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जिसके बाद केंद्र सरकार के खनन मंत्री के आदेश पर जियोलॉजिकल सर्वेक्षण विभाग के हजारीबाग और बोकारो की टीम पिछले डेढ़ साल से असुरहड्डी के जंगल में इसका सर्वे कर रही है। इसके लिए असुरहड्डी जंगल के कई स्थानों पर बोरिंग की गई है और अभी भी बोरिंग का कार्य जारी है। एक स्थान में अब तक लगभग 16 सौ मीटर बोरिंग की गई है। जहां पर लिथियम धातु का भंडार पाया गया है। मालूम हो कि लिथियम एक नरम और सफेद रंग का धातु है। इसका उपयोग मुख्य रूप से रिचार्जेबल बैटरी बनाने में होता है। लिथियम इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल, लैपटॉप आदि की बैटरी बनाने में काम आता है। दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने के साथ ही लिथियम का महत्व काफी बढ़ गया है। यही वजह है कि लिथियम का भंडार मिलने की खबर मिलने पर फौरन भारत सरकार के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सचिव सह महानिदेशक तिसरी के असुरहड्डी जंगल आ धमके। इसकी सुरक्षा में लोकाय नयनपुर थाना की पुलिस तैनात थी। इधर लिथियम मिलने से तिसरी में बड़ा प्लांट लगाए जाने की लोगों को उम्मीद है।

लिथियम भंडार वाले प्रमुख राज्य और क्षेत्र

जम्मू-कश्मीर : रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन का बड़ा भंडार मिला है।

राजस्थान : नागौर जिले के डेगाना में भी विशाल भंडार की खोज की गई है।

छत्तीसगढ़ : कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) के ब्लॉक पाए गए हैं, जहां खनन प्रक्रिया चल रही है।

कर्नाटक: मांड्या जिले में भी लिथियम के भंडार मिले हैं।

अन्य संभावित राज्य: बिहार, ओडिशा, झारखंड, और तमिलनाडु।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, ये खोजें भारत को इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगी। भारत में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जा रहा है।

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