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सरकार की किसानों को सस्ते ब्याज दर पर ऋण देने की घोषणा हवा हवाई!

  • सहकारी ग्राम विकास बैंक अभी भी 11.50 प्रतिशत दर पर दे रहा किसानों को लोन
  • मुख्यमंत्री कृषि समृद्धि योजना से लाभान्वित होते 2.86 करोड़ किसान
  • उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव ग्राम विकास बैंक की तानाशाही हुआ खुलासा

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। प्रदेश सरकार को किसानों को सस्ती ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराने की घोषणा हवा हवाई साबित हुई। किसानों को सहकारी ग्राम विकास बैंकों के माध्यम से 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराए जाने की घोषणा हुई थी। इस घोषणा के बाद भी किसानों को करीब 11.50 प्रतिशत ब्याज दर पर ही ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण में ब्याज दर नहीं घटने से किसान अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं। इससे किसान काफी आहत भी नजर आ रहे हैं।

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विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के मुताबिक बीते दिसंबर माह में प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक बड़ा ऐलान किया था। इसके तहत किसानों को सहकारी ग्राम विकास बैंक से 6 प्रतिशत की दर से ऋण उपलब्ध कराए जाने की घोषणा की थी। इस ऐलान को हुए करीब तीन माह का समय बीत चुका है लेकिन स्थित आज भी जस की तस बनी हुई है। किसानों की अभी भी 11.50 प्रतिशत ब्याज दर पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

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सरकार ने घोषणा के दौरान कहा था कि किसानों को सहकारी ग्राम विकास बैंकों के माध्यम से मात्र 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि शेष ब्याज का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इस घोषणा से प्रदेश के किसानों मेवजफी उम्मीद जगी थी। वर्तमान समय में स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव ग्राम विकास बैंक से किसानों को अब भी करीब 11.50 प्रतिशत की दर पर ही ऋण मिल रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार की घोषणा को अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है।

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सरकार की योजना के मुताबिक लघु और सीमांत किसानों को यह ऋण मास्टर 6 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाना था। यह सुविधा मुख्यमंत्री कृषि समृद्धि योजना के तहत दी जानी थी। जिसके अंतर्गत सहकारी ग्राम विकास बैंक (LDB) के माध्यम से ऋण दिया जाना प्रस्तावित था और शेष ब्याज का भुगतान राज्य सरकार को किया जाना था। इस योजना से प्रदेश के करीब दो करोड़ लघु और सीमांत किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई थी। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 2.86 करोड़ किसान हैं। जिनमें करीब 78 प्रतिशत सीमांत 14 प्रतिशत लघु किसान हैं। एक हेक्टेयर से कम भूमि रखने वाले किसानों को सीमांत और 1 से 2 हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को लघु किसान की श्रेणी में रखा जाता है।

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