यशोदा श्रीवास्तव
काठमांडू। नेपाल चुनाव में जब नेपाली कांग्रेस की स्थिति बेहद दयनीय रही तब यूपी के CM योगी के करीबी नेपाली कांग्रेस उम्मीदवार का जीत जाना नेपाल के तराई में एक संदेश है। उनके करीबियों का मानना है कि अभिषेक प्रताप शाह की जीत हिंदुत्व वादी विचार धारा की जीत है। भारत नेपाल सीमा से सटे नेपाल के कृष्णा नगर का शाह घराना मूलतः भारतीय मूल का है। गोरखपुर के उनवल के रहने वाला यह परिवार अंग्रेजी शासन में ही सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी कसबे से सटे नेपाल के कृष्णा नगर में बस गया था। इस परिवार का नेपाल के राजपरिवार से निकट का संबंध रहा है। अभिषेक प्रताप शाह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो चौथी बार सांसद चुने गए। इनके बाबा और पिता भी राजनेता रहे हैं।
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अपने पिता के असामयिक निधन के बाद परिवार की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए अभिषेक प्रताप शाह ने मधेश आधारित राजनीतिक दल मधेशी जन अधिकार फोरम से राजनीति की शुरुआत की थी। दो बार वे इसी पार्टी से सांसद चुने गए। एक बार तो हाल यह था कि मधेशी जन अधिकार फोरम से ये अकेले सांसद चुने गए थे। विपरीत परिस्थितियों में राजनीति करने वाले अभिषेक प्रताप शाह एक बार छोड़कर हर चुनाव जीतने में कामयाबी हासिल की है।
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नेपाली कांग्रेस की विचारधारा से विपरीत अभिषेक प्रताप शाह नेपाल की राजनीति में एक कट्टर हिन्दू वादी चेहरा हैं। वे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और सांसद जगदंबिका पाल को अपना आदर्श मानते हैं। नेपाल का यह चुनाव बेहद कठिन परिस्थितियों में संपन्न हुआ और राजशाही मुक्त के बाद पहली मर्तबा नेपाल को किसी एक पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार नसीब हो रहा है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की झकझोर लहर में जब पहाड़ से मैदान तक इसके उम्मीदवार जीत रहे हों तब मैदानी इलाके से नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप अभिषेक प्रताप शाह का चुनाव जीतना बड़ी बात है। चौथी बार सांसद चुने गए अभिषेक प्रताप शाह ने अपने जीत का श्रेय क्षेत्र की जनता, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद जगदंबिका पाल को दी है।
