महंगाई मापने का नया फॉर्मूला, डिजिटल खर्च भी आए दायरे में

देश में खुदरा महंगाई दर (CPI) की गणना के तरीके में व्यापक बदलाव लागू कर दिया गया है। नई सीरीज में आधार वर्ष 2012 की जगह अब 2024 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों की तुलना 2024 को संदर्भ वर्ष मानकर की जाएगी। यह संशोधन केवल आधार वर्ष बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली और खर्च की आदतों को भी इसमें शामिल किया गया है।

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पिछले एक दशक में खरीदारी के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल पेमेंट और ओटीटी प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सामान और डिजिटल सब्सक्रिप्शन की फीस भी महंगाई की गणना का हिस्सा बनेगी। Amazon Prime Video, Netflix, JioHotstar और Sony LIV जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म की सदस्यता शुल्क अब सीधे आंकड़ों में जोड़ी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत 1,465 ग्रामीण और 1,395 शहरी बाजारों को शामिल किया गया है, जो 434 कस्बों में फैले हैं। इसके अलावा 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 बड़े शहरों में 12 ऑनलाइन बाजारों को भी जोड़ा गया है। ग्रामीण और शहरी बाजारों से कीमतों का डेटा हर महीने इकट्ठा किया जाएगा, जबकि ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली जाएंगी।

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वस्तुओं और सेवाओं की संख्या भी बढ़ाई गई है। अब कुल 358 वस्तुएं और सेवाएं महंगाई टोकरी में शामिल होंगी, जबकि पहले यह संख्या 299 थी। सेवाओं का दायरा 40 से बढ़ाकर 50 कर दिया गया है। इससे उपभोक्ता खर्च का अधिक यथार्थ चित्र सामने आने की उम्मीद है। खाने-पीने की वस्तुओं का भार घटाकर 36.75% कर दिया गया है। पहले यह हिस्सा 45% से अधिक था। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है ताकि महंगाई दर वास्तविक उपभोग पैटर्न को बेहतर तरीके से दर्शा सके।

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