लखनऊ। शुक्रवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के तहत की गई है। जानकारी के मुताबिक, मनोज यादव पिछले दो दिनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे थे। उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच STF की टीम को उनके संभावित ठिकाने की सूचना मिली। बताया जा रहा है कि जब वह अपने कुछ साथियों के साथ सफदरगंज इलाके से गुजर रहे थे, तभी टीम ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया।
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गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा मानकों के तहत उन्हें बड़ागांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में उन्हें लखनऊ लाया गया। उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गिरफ्तारी किन धाराओं या आरोपों के तहत की गई है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई कुछ लंबित मामलों या खुफिया इनपुट के आधार पर की गई हो सकती है। वहीं, STF का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और विधिसम्मत है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उठाया गया है। उनका कहना है कि जब भी विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, तब इस तरह की कार्रवाइयों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।
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दूसरी ओर, सरकार समर्थकों का कहना है कि कानून सबके लिए समान है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उनका तर्क है कि यदि किसी के खिलाफ जांच या कार्रवाई होती है, तो उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इस बीच, लखनऊ में सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर नारेबाजी की खबरें भी सामने आई हैं। पुलिस प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। सोशल मीडिया पर भी इस गिरफ्तारी को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे सख्त कानून व्यवस्था की मिसाल बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला कह रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मनोज यादव के खिलाफ क्या औपचारिक आरोप तय किए जाते हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है। यदि मामला न्यायालय तक पहुंचता है, तो वहां से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, यह गिरफ्तारी प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ लेकर आई है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज और तेज होने की संभावना है।
