संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते में भारत के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के बयान के बाद सत्ता पक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने की घोषणा कर दी।
क्या कहा राहुल गांधी ने?
बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते में भारत ने बराबरी की स्थिति में बातचीत नहीं की। राहुल ने दावा किया कि इस डील के कारण भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी वैश्विक शक्ति के सामने झुककर समझौता नहीं करना चाहिए। राहुल गांधी के अनुसार, अगर विपक्ष की सरकार होती तो वह “बराबरी की शर्तों” पर बातचीत करती। उनके बयान में यह भी संकेत था कि देश की आर्थिक नीतियों पर बाहरी प्रभाव बढ़ रहा है।
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सरकार की तीखी प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के आरोपों के तुरंत बाद किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में इन टिप्पणियों को निराधार और असंसदीय बताया। उन्होंने कहा कि “देश को कोई बेच नहीं सकता और न ही कोई खरीद सकता है।” रिजिजू ने आरोप लगाया कि बिना प्रमाण और बिना पूर्व सूचना के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही के नियमों के अनुसार यदि कोई सदस्य किसी अन्य सदस्य या सरकार पर गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे पहले नोटिस देना होता है और आरोपों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने होते हैं।
विशेषाधिकार हनन नोटिस क्या है?
विशेषाधिकार हनन नोटिस तब लाया जाता है जब किसी सांसद पर यह आरोप हो कि उसने सदन को गुमराह किया है या संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के बयान से सदन भ्रमित हुआ है, इसलिए इस मामले को नियमों के तहत उठाया जाएगा।
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आगे क्या?
रिजिजू ने मांग की कि राहुल गांधी को सदन में अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। संसद का बजट सत्र पहले ही विभिन्न मुद्दों पर हंगामे का साक्षी रहा है। ऐसे में यह नया विवाद सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकता है।
