- सूबे में खतरनाक मांझा बना चुनौती, घटना के बाद सीएम को देना पड़ा दखल
- आखिर किन गलियारों में बिकता है प्रतिबंधित मांझा, जहां नहीं पहुंच पा रही खाकी
- राजधानी लखनऊ सहित यूपी के अलग-अलग जिलों में चला चेकिंग अभियान फिर भी नहीं मिला चाइनीज मांझा
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। जनवरी महीने में जौनपुर जिले में प्रतिबंधित मांझे से कटकर फिजियोथेरेपी समीर हाशमी और शिक्षक संदीप तिवारी और राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे की धार से कटकर एमआर मोहम्मद शोएब की मौत तथा मांझे की चपेट में आकर घायल हुए सेवानिवृत्त फौजी ब्रजेश राय। इन घटनाओं ने मानों पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं के बाद यही लगता है कि सूबे में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। प्रतिबंधित धागे से उड़ानें वाले पतंगबाजों में खाकी का खौफ नहीं है। राह चलते लोग चाइनीज मांझे की चपेट घायल हो रहे हैं और इससे न जाने कितने लोगों की जानें भी जा चुकीं हैं। राजधानी लखनऊ और जौनपुर जिले में हुई घटना के बाद चाइनीज मांझा पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दखल देना पड़ा।
सीएम की सख्ती के बाद पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के निर्देशन में गुरुवार को प्रदेश भर में चेकिंग अभियान चलाया गया, लेकिन खास बात यह है कि पुलिस कहीं से कोई चाइनीज मांझा बरामद नहीं कर पाई। यही नहीं इस दौरान जिलों के सभी सर्किल अफसर भी चेकिंग अभियान में जुटे रहे, लेकिन कहीं भी चाइनीज मांझा बिकते नहीं मिला। सवाल है कि आखिर किन गलियारों में इसकी बिक्री होती है, जहां खाकी नहीं पहुंच पाई। यूपी के अलग-अलग जिलों में हुई घटनाएं इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रहीं हैं कि कहीं न कहीं जरुर प्रतिबंधित मांझे की खरीद-फरोख्त होती हैॽ जौनपुर और लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे से कटकर तीन लोगों की जानें चली गई। दुबग्गा क्षेत्र निवासी मोहम्मद शोएब घर का इकलौता बेटा था, जिसकी मौत के बाद परिवार का सहारा छीन गया।
पुलिस की निष्क्रियता से बढ़ रहा चाइनीज मांझा का कारोबार
प्रतिबंधित मांझे से कटकर हुई तीन लोगों की ने मानों सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। गली-कूचों और सड़कों तक चाइनीज मांझे की धार पतंग के साथ दिखाई दे रहा है इसके बावजूद पुलिस इन पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रही है।
