नई दिल्ली। तेलंगाना में नगर निगम चुनाव से पहले AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। निजामाबाद में आयोजित एक रैली में ओवैसी ने कहा कि भारत में मुस्लिम आबादी कभी भी हिंदू आबादी से ज्यादा नहीं होगी। उन्होंने यह बात उस बहस के संदर्भ में कही, जिसमें मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।
डेमोग्राफी से ध्यान हटाने का आरोप
ओवैसी ने कहा कि देश में असली चुनौती बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और भविष्य में बुजुर्ग होती आबादी है, लेकिन इसके बजाय ध्यान धर्म आधारित जनसंख्या बहस पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आज की युवा पीढ़ी वृद्ध होगी और तब सरकारों को पेंशन, स्वास्थ्य और खर्चों का बड़ा बोझ उठाना पड़ेगा।
युवा भारत और रोजगार का सवाल
AIMIM प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें भारत को युवा देश बताया गया था। ओवैसी ने सवाल किया कि अगर भारत की आबादी युवा है तो उनके लिए रोजगार और स्किल ट्रेनिंग की ठोस योजना कहां है। उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर राजनीति करने से भविष्य सुरक्षित नहीं होगा।
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मुस्लिम आबादी को लेकर भ्रम
ओवैसी ने दावा किया कि मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर भी धीरे-धीरे स्थिर हो रही है और इसे लेकर डर फैलाना गलत है। उन्होंने दोहराया कि भारत की सामाजिक संरचना में मुसलमान कभी बहुसंख्यक नहीं बनेंगे, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
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अन्य मुद्दों पर भी हमला
अपने भाषण में ओवैसी ने पाकिस्तान, चीन और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार की स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती, जबकि देश के भीतर भावनात्मक मुद्दों को हवा दी जाती है।
चुनावी रणनीति या वैचारिक बयान?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल चुनावी नहीं बल्कि एक वैचारिक प्रतिक्रिया भी है, जिसके जरिए ओवैसी जनसंख्या आधारित राजनीति को चुनौती देना चाहते हैं और असली सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहस खींचना चाहते हैं।
