द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत आज: जानिए शुभ तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

राजेन्द्र गुप्ता 

 हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन-वैभव बना रहता है। हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 5 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 4 फरवरी, बुधवार की रात 12 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी और 5 फरवरी, गुरुवार की रात 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि का चंद्र उदय 5 फरवरी को होगा, इसलिए इसी दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सुकर्मा, धृति और मातंग नामक योग भी बन रहे हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  • 5 फरवरी, गुरुवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर व्रत नियमों का पालन करें।
  • शुभ मुहूर्त में घर के किसी साफ स्थान पर चौकी रखकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान को तिलक लगाएं, पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद रोली, चावल, अबीर, गुलाल, कुमकुम, वस्त्र, जनेऊ, पान और नारियल अर्पित करें।
  • पूजा में दूर्वा जरूर चढ़ाएं और अपनी श्रद्धा अनुसार भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में भगवान गणेश की आरती करें।
  • चंद्रमा के दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दें और पुष्प अर्पित करें।
  • मान्यता है कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व

इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है। माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश के भक्त इस दिन कठिन व्रत रखते हैं ताकि उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ है सभी कष्टों को दूर करने वाली चतुर्थी।  मान्यता है कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, उन्हें जीवन की सभी समस्याओं का समाधान मिलता है और सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं और कठिनाइयां दूर होती हैं।

 

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