- नाथनगर ब्लाक क्षेत्र के अजावं में चल रही नौ दिवसीय श्रीचंडी महायज्ञ व कथा
संतकबीर नगर। नाथनगर ब्लॉक क्षेत्र के अजांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीचंडी महायज्ञ व कथा में वृंदावन धाम से पधारे कथा ब्यास लीलाधर दास महाराज ने सोमवार को प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वन गमन के प्रसंग का हृदय स्पर्शी वर्णन किया। कथा का रोचक प्रसंग सुन महिलाएं द्रवित हो उठी। कथा व्यास लीलाधर दास महाराज ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम के राजतिलक की तैयारियां चल रहीं थी, उसी वक्त मंथरा ने कै केयी की मति भ्रमित कर दी, और अपनी कुटिल बातों में उलझा दिया। जिसके बाद कैकेयी कोप भवन में चली गईं।
वहां पर उन्होंने राजा दशरथ से दो वचन पूर्ण करने की मांग की। जिस पर राजा दशरथ चिंतित हो गए। यह जानकारी प्रभु श्रीराम को होने पर उन्होंने सहर्ष 14 वर्ष का वनवास और भरत के राजतिलक के वचन को पूर्ण करने के लिए सहमति दे दी। प्रभु श्रीराम के इस फैसले से पूरी अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई। कथा ब्यास ने बताया कि यदि भगवान श्रीराम वन न जाते तो राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम न बन पाते। अपनी माता केकई की आज्ञा मान कर श्रीराम, लक्ष्मण साथ में मां जानकी तीनों प्राणी वन की यात्रा पर निकले। कथा ब्यास ने बताया कि माता-पिता भगवान से बढ़कर होते होते है। माता-पिता की सेवा करने वाले कभी दु:खी हो ही नहीं सकते हैं। इस मौके पर महेश उपाध्याय, पवन पाण्डेय, विपिन ओझा, रामनेवास यादव, भोला राजभर ,रामगती राजभर, अभिषेक तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।
