पीलीभीत: उत्तर प्रदेश में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर उठ रहा विरोध अब प्रशासनिक महकमे के बाद राजनीतिक संगठनों तक पहुंचता नजर आ रहा है। बरेली में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद अब पीलीभीत जिले से भी इस्तीफे का मामला सामने आया है। यहां भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने यूजीसी और एससी-एसटी एक्ट के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
मामला पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र के चपरौवा कुइयां गांव का है, जहां भाजपा बूथ अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी ने मंडल अध्यक्ष को पत्र भेजकर पद छोड़ने का ऐलान किया। मंगलवार को उनका इस्तीफा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई।
इस्तीफे में कृष्ण कुमार तिवारी ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह पार्टी द्वारा यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट जैसे कानूनों के समर्थन से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, ये कानून समाज में समानता के बजाय विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णयों से जुड़ा रहना उनके वैचारिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ है।
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उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वह लंबे समय से समाज के सभी वर्गों के बीच समरसता की सोच के साथ जुड़े रहे हैं, लेकिन मौजूदा नीतियां उस दिशा में जाती नहीं दिख रहीं। ऐसे में आत्मसम्मान और विचारधारा के साथ समझौता करना उनके लिए संभव नहीं है।
इससे पहले गणतंत्र दिवस के अवसर पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा देकर यूजीसी के नए नियमों पर सवाल खड़े किए थे। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा राज्यव्यापी बहस का विषय बन गया है।
हालांकि, बिलसंडा मंडल अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें अभी तक लिखित रूप में इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह पत्र केवल सोशल मीडिया पर देखा है और पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है।
यूजीसी नियमों को लेकर बढ़ते असंतोष और अब राजनीतिक स्तर पर सामने आ रहे विरोध से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
