- फोन कर बहाने से बुलाया और गला दबाकर मौत की नींद सुलाने के बाद शव रेलवे लाइन पर फेंक दिया था
- मुख्य कातिल सहित चार हत्यारे गिरफ्तार, घटना में इस्तेमाल टाटा सफारी बरामद
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। सरोजनीनगर क्षेत्र स्थित रेलवे लाइन पर जिस नाबालिग बच्ची की खून से लथपथ लाश मिली थी उसकी ट्रेन से कटकर नहीं बल्कि उसी के प्रेमी काकोरी क्षेत्र के पठान खेड़ा गांव निवासी अंशू गौतम उर्फ लक्की ने अगवा कर अपने तीन साथियों के साथ मिलकर मौत की नींद सुलाया था। पुलिस इस सनसनीखेज मामले का राजफाश कर सोमवार को मुख्य हत्यारोपी काकोरी क्षेत्र स्थित पठान खेड़ा गांव निवासी अंशू गौतम उर्फ लक्की, पारा निवासी आशिक यादव, पारा निवासी वैभव सिंह व कुल्हड़ कट्टा पारा निवासी रिशू यादव को गिरफ्तार कर घटना में इस्तेमाल टाटा सफारी गाड़ी बरामद किया है। सनद रहे कि 16 जनवरी 2026 को पारा क्षेत्र में रहने वाली एक महिला थाने में सूचना देकर बताया कि उसकी 16 वर्षीय बेटी को पारा निवासी अंशू गौतम उर्फ लक्की 13 जनवरी 2026 को बहला-फुसलाकर कहीं भगा ले गया है।
पारा पुलिस काफी जद्दोजहद के बाद पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन उसके बाद से हाथ पर हाथ धरे बैठ गई, नतीजतन बेखौफ हत्यारों ने पीड़िता की बेटी की गला दबाकर मौत की नींद सुलाने के बाद शव को सरोजनीनगर क्षेत्र स्थित रेलवे लाइन पर फेंक दिया था। ताकि लोगबाग समझें कि नाबालिग बच्ची ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी है। शव की पहचान होने के बाद चुपचाप बैठी पारा पुलिस की नींद टूटी और आनन-फानन में आजाद बनकर घूम रहे अंशू को धरदबोचा।
पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो अंशू गौतम ने बताया कि वह नाबालिग बच्ची से प्रेम करता कि इसी दौरान वह उसके मित्र आशिक यादव से बात करने लगी। इस बात की भनक लगते ही अंशू ने नाबालिग बच्ची को हमेशा के लिए खत्म करने की योजना बनाई और बहाने से बुलाकर अपनी टाटा सफारी गाड़ी में ही अपने तीनों साथियों आशिक यादव, वैभव व रिशू के साथ मिलकर बेबस लड़की को मौत की नींद सुला दिया।
विफलता: नाबालिग बच्ची को बचा न सकी पुलिस
पारा से अपह्रत लाडली की हत्या, हत्यारों के आगे घुटने टेक गई खाकी 16 वर्षीय बच्ची की मौत पुलिस की भीषण विफलता का सुबूत है। एक सप्ताह से तफ्तीश का दावा कर रही पुलिस उसे बचा न सकी। सर्विलांस से लेकर मुखबिर तंत्र तक सभी कवायदें बेखौफ अपहरणकर्ताओं के आगे घुटने टेक गई। पुलिस ने मुख्य नामजद आरोपी व उसके साथियों को गिरफ्तार कर भले ही इस कांड का खुलासा कर दिया है, लेकिन यह घटना पुलिस के गिरते इकबाल की गवाह है। इस बात की भी कि अपराधी किस कदर बेखौफ होकर पुलिस को कभी भी और कहीं भी चुनौती देकर कुछ भी कर सकते हैं।
