ए अहमद सौदागर
लखनऊ। चार दिसंबर 2015, 27 फरवरी 2015, पांच मार्च 2016 व एक दिसंबर 2017। राजधानी लखनऊ पुलिस के लिए ये चार संगीन वारदातें काफी हैं। बदमाशों ने बेखौफ होकर दो महिलाओं सहित आठ लोगों की हत्या कर सनसनी फैला दी। ये कत्ल किसी अन्य जिलों में नहीं बल्कि वहां की सरजमीं पर हुईं, जहां रात-दिन लाल नीली लगी बत्ती वाली गाड़ियां सायरन बजाती हुई निकलतीं हैं। इस दौरान पुलिस चौकसी भी मजबूत होती है, लेकिन इन्हीं कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच बेखौफ बदमाशों ने गोलियों की बौछार कर छह लाशें बिछा दी, जबकि दो महिलाओं की किसी धारदार हथियार से गला काट कर मौत की नींद सुला दिया। इन घटनाओं का खुलासा करने के लिए पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीमों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन आज तक हत्यारों का कुछ सुराग नहीं लग पाया। पुलिस की सुस्त विवेचना से यही लग रहा है कि पुलिस ने हार मान चुकी है और फाइलें दफन कर चुपचाप बैठ गई है।
राजधानी लखनऊ पुलिस की कार्यशैली पर एक नजर
पहली घटना : मड़ियांव क्षेत्र के आईआईएम रोड पर करीब एक किलोमीटर के दायरे में चार पैर और दो महिलाओं के धड़ मिले। इस मामले में महिलाओं के शवों की पहचान कराने तथा हत्यारों की तलाश में पुलिस पूरा जोर लगा दिया, लेकिन दस साल बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।
दूसरी घटना : हसनगंज क्षेत्र स्थित चरही बाजार में HDFC बैंक के एटीएम बूथ के बाहर असलहों से लैस बदमाशों ने एक कस्टोडियन सहित तीन लोगों के सीने में गोलियां बरसा कर मौत की नींद सुला दिया और नोटों से भरा बाक्स लूट कर भाग निकले। यह घटना उस स्थान पर हुई जहां से कुछ ही दूरी पर पुलिस लाइन है जहां 24 घंटे पुलिस के जवान गन लेकर मुस्तैद रहते हैं। इस मामले में भी पुलिस आतंकी कनेक्शन से लेकर अन्य पहलुओं पर पड़ताल की, लेकिन खूनी लुटेरे हाथ नहीं लग सके।
तीसरी घटना : विकासनगर सेक्टर तीन में बाइक सवार बदमाशों ने बागपत जेल में मारे गए माफिया मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह व उसके साथी संजय मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज मामले में भी पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन कातिल आज तक हाथ नहीं लग सके।
चौथी घटना : गोमतीनगर क्षेत्र के ग्वारी गांव के पास माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी मोहम्मद तारिक के सीने में गोलियों की बौछार कर बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया। यह सनसनीखेज वारदात उस समय हुई थी जब मतगणना के दौरान शहर छावनी में तब्दील था। पुलिस कातिलों की तलाश में राजधानी लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों तक डेरा डाला, लेकिन हत्यारे हाथ नहीं लग सके। पुलिस की कार्यशैली पर गौर करें तो 2015,2016 व 2017 , 18,19,20,21,22,23,24,25 के बाद अब नए साल 2026 का आगाज हो गया, लेकिन कई संगीन वारदातों का पुलिस राजफाश करने में नाकाम रही।
