पाँच जनवरी को गोरखपुर आएंगे यूपी भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पंकज चौधरी!

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  • स्वागत में लाखों की भीड़ जुटाने के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को मिला संदेश
  • स्वागत कार्यक्रम को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय ने गोरखपुर में डाला डेरा

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

गोरखपुर/महराजगंज। भाजपा के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी 5 जनवरी को पहली बार अपने गृह जनपद गोरखपुर आ रहे हैं। बताते हैं कि स्वागत में एक लाख की भीड़ जुटाने के लिये बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को संदेश भेज दिया गया है। हर बूथ से प्रमुख लोग प्रदेश अध्यक्ष के प्रथम आगमन के स्वागत में उपस्थित रहें। गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिये लगातार प्रवास कर रहे हैं। बता दें कि गोरखपुर क्षेत्र में तीन प्रशासनिक मंडल और दस प्रशासनिक जिले हैं। गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया के कार्यकर्ता गोरखपुर में जुटेंगे।

इसमें गोरखपुर और आजमगढ़ में दो-दो इकाइयां हैं। गोरखपुर में महानगर और जिला जबकि आजमगढ़ में आजमगढ़ नगर और लालगंज जिला हैं। प्रदेश महामंत्री व विधान परिषद सदस्य गोविंद नारायण शुक्ला गोरखपुर क्षेत्र में संगठन के प्रभारी हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र छोड़ दिया जाय तो वर्तमान में उत्तर प्रदेश में गोरखपुर यूपी भाजपा का शक्ति केंद्र है। हालांकि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह प्रदेश की राजधानी लखनऊ की लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की शक्ति के मामले में लखनऊ आज की तारीख में गोरखपुर के सामने दूर-दूर तक नहीं टिकता। लखनऊ में दो लोकसभा क्षेत्रों लखनऊ और मोहनलालगंज है। लखनऊ से स्वयं राजनाथ सिंह सांसद हैं, जबकि मोहनलालगंज भाजपा के केंद्रीय राज्यमंत्री रहे कौशल किशोर 2024 में हार गये थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभाओं में से भाजपा तीन ही जीत पायी थी। जबकि गोरखपुर में भाजपा दोनों लोकसभा सीटों के साथ सभी दसों विधानसभा भी जीती है।

यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल का गढ़ है। दो-दो केंद्रीय राज्यमंत्री हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी स्वयं केंद्रीय राज्यमंत्री हैं साथ ही बांसगांव लोकसभा सीट के सांसद कमलेश पासवान भी केंद्रीय राज्यमंत्री हैं। भाजपा के पूर्व विधान परिषद सदस्य विनोद पांडेय भी गोरखपुर से ही हैं। राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ राधामोहन अग्रवाल गोरखपुर से ही हैं। राज्यसभा में होने के पहले वह लगातार चार बार नगर के उसी विधानसभा सीट से विधायक होते थे जिस पर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधायक हैं। राष्ट्रीय मंत्री व राज्यसभा सदस्य संगीता यादव भी गोरखपुर से ही हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य डॉ धर्मेंद्र सिंह भी गोरखपुर से ही हैं। उन्हें कभी लगता ही नहीं कि वह क्षेत्रीय अध्यक्ष नहीं हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष होने के बाद भी वह आज भी गोरखपुर क्षेत्र में अपना संपर्क क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसा ही रखते हैं। योगी जी के कार्यक्रमों में उनकी झलक सदैव है। आज भी वह बहुत बड़ी संख्या में गोरखपुर शहर के कार्यकर्ताओं को डील करते हैं। बिना उनके सक्रिय हुए पंकज चौधरी का कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

माना जाता है कि योगी के मुख्यमंत्री होने के बाद भी उन्हें आज भी योगी के खास होने का सामाजिक प्रमाण पत्र प्राप्त है। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह भी गोरखपुर के ही हैं। उन्होंने पूरे प्रदेश में नये-नये किसानों को पार्टी से जोड़ा है। उन्होंने अपनी ताकत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया है। फिर भी गोरखपुर क्षेत्र उनके बनाये विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं की खान है। इस क्षेत्र में उन्होंने किसान से ज्यादा कार्यकर्ता खड़ा किया है। पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में पर्दे के पीछे से डॉ राधा मोहनदास अग्रवाल की सबसे बड़ी और प्रभावी भूमिका मानी जा रही है। डॉ राधामोहन दास अग्रवाल गोरखपुर पंकज चौधरी के प्रथम आगमन पर गोरखपुर में नहीं रहेंगे। वहीं बहुत बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी देखना चाहता है। उनका कार्यक्रम रहेगा या नहीं यह 5 जनवरी के आस-पास ही पता चल पायेगा। प्रदेश के जलशक्ति मंत्री व गोरखपुर के प्रभारी मंत्री पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के उपस्थित पर भी सबकी निगाह है।

बता दें कि विधानमंडल शीत कालीन सत्र के दौरान ब्राह्मण विधायकों के सामान्य एकत्रीकरण पर पंकज चौधरी द्वारा की गयी टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया था। हालांकि धीरे-धीरे अब वह शांत हो रहा है। वैसे भी गोरखपुर अभी तक ब्राह्मण-ठाकुर की तल्खी के लिये बदनाम था। अब इसमें कुर्मी-ब्राह्मण के रिश्तों में एक भ्रम चल पड़ा है। उसी दिन उस भ्रम की भी परीक्षा हो जायेगी। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सम्पन्न कुर्मी को प्रदेश की कमान देकर अखिलेश यादव के पीडीए की कमर तोड़ने के लिये किया था। ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर उनकी टिप्पणी का जो बैक फायर हुआ उससे उनकी की कमर चरमरा गयी।

गोरखपुर क्षेत्र में कई लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां कुर्मी मतदाता प्रभावी संख्या में हैं। सूत्रों की माने तो संगठन के जिम्मेदार ने पंकज चौधरी के स्वागत में ठाकुर और ब्राह्मण कार्यकर्ताओं को सक्रियता से लगने का आदेश दिया गया है। वह लगातार गरज रहे हैं कि समाज में जातीय वैमनस्यता किसी भी कीमत पर नहीं फैलने देंगे। जरूरत हुई तो कड़ा कदम भी उठायेंगे। उसके बाद भी कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि ब्राह्मण कार्यकर्ता पंकज चौधरी के कार्यक्रम से कन्नी काटेंगे। फिलहाल पूर्वांचल की जटिल जातीय राजनीति के जानकार मानते हैं कि ठाकुर-ब्राह्मण अपनी प्रतिक्रिया अवश्य प्रकट करेंगे। यह दबने वाली जाति नहीं है। राजनैतिक रूप से वह इतना अनाड़ी नहीं है कि पंकज चौधरी के स्वागत में टूट पड़े और योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर से ही मजबूत चुनौती मिलने लगे। वैसे भी अभी तक जितने लोग योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल कर पस्त हुए हैं वह सभी लोग भी पंकज चौधरी की पीठ पर चढ़ कर अपनी हताश का इलाज खोजेंगे। हालांकि पंकज चौधरी के अध्यक्ष होते ही कुछ ऐसे लोग भी पुनः सक्रिय हो गये हैं जो नेपथ्य में चले गये थे। उनके सोशल प्लेटफार्म एकायक सक्रिय हो गये हैं।

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