नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। बैठक का मुख्य फोकस मनरेगा की जगह लागू किए गए वीबी-जी राम जी कानून और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर रहा। कांग्रेस नेताओं ने इसे ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर हमला बताया और इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध का फैसला किया।
बैठक से पहले सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा सरकार की यह योजना लाखों गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी थी, लेकिन नया कानून रोजगार की गारंटी को कमजोर करता है। कांग्रेस इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, शशि थरूर समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में संगठनात्मक मजबूती, आगामी जनआंदोलन और विपक्षी एकता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज किए जाएंगे।
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इसके साथ ही, अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया। असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों को देखते हुए प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत करने और मुद्दा आधारित राजनीति पर फोकस करने का फैसला किया गया। बैठक के दौरान असम की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार, अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक विफलताओं के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को जनता के सामने लाएगी।
बैठक की शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देकर उनके योगदान को याद किया गया। कुल मिलाकर, कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक आगामी आंदोलनों और चुनावी राजनीति की रूपरेखा तय करने में निर्णायक मानी जा रही है।
