
- समय पर उपचार नहीं मिलने से लखनऊ जेल में हुई बंदी की मौत
- एम्बुलेंस चालक के विलंब से आने के कारण बंदी ने जेल में दम तोड़ा
- धनाढ्य बंदियों की आरामगाह बना लखनऊ जेल का अस्पताल
नया लुक संवाददाता
लखनऊ। राजधानी की जिला जेल के अस्पताल में बीमार बंदियों का नहीं है स्वस्थ बंदियों का ही इलाज होता है। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन सत्य है। जेल में निरुद्ध एक विचाराधीन युवा बंदी की समय पर उपचार नहीं मिल पाने को वजह से मौत हो गई। जेल प्रशासन के अधिकारी बंदी की मौत हो जेल से ले जाने के दौरान अस्पताल में बता रहे है जबकि हकीकत ठीक इसके विपरीत है। जेल से अस्पताल ले जाने में हुई हीलाहवाली की वजह से जेल में ही बंदी की मौत हो गई थी। उधर जेल प्रशासन के अधिकारियों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।
जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक चोरी के आरोप में आशियाना पुलिस ने मिथुन (29) को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सूत्रों का कहना है कि जेल में निरुद्ध विचाराधीन बंदी मिथुन की अचानक तबियत खराब हो गई। आनन फानन में बंदी को उपचार के लिए जेल अस्पताल ले जाया गया। जहां मौजूद डॉक्टर ने बंदी की हालत गंभीर देखते हुए उसे उपचार के लिए जेल के बाहर जिला अस्पताल (बलरामपुर अस्पताल) भेजने के लिए रेफर कर दिया। सूत्रों की माने तो इसके बाद एम्बुलेंस चालक के विलंब से आने और बंदी को जल्दी अस्पताल पहुंचाने की ऊहापोह की स्थिति में ही बंदी ने जेल में ही दम तोड़ दिया।
उधर लखनऊ जेल के जेलर ऋतिक प्रियदर्शी ने लगाए गए आरोपों को सिरे से नकारते हुए बताया कि बंदी मिथुन दो दिन से जेल अस्पताल में भर्ती था। कल दोपहर जब बंदी की हालत बिगड़ी तो उसको उपचार के लिए बलरामपुर अस्पताल भेजा गया। जहां से अस्पताल के डॉक्टरों ने उसको ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान बंदी की मौत हो गई। युवा बंदी की एकाएक हुई मौत से बंदियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। बंदियों का आरोप है जेल अस्पताल में बीमार बंदियों का नहीं सिर्फ धनाढ्य बंदियों का ही उपचार किया जाता है। जेल डॉक्टर धनाढ्य बंदियों से मोटी रकम लेकर उन्हें जेल अस्पताल में भर्ती कर लेते है। उधर इस संबंध में जब लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी जेल रामधनी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना ही उचित नहीं समझा।

