उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र में सोमवार को विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सत्र की शुरुआत शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दों के साथ हुई, जिसमें परिषदीय स्कूलों का मर्जर, शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा की गुणवत्ता प्रमुख रूप से उठाई गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसलों से ग्रामीण इलाकों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे अश्लील कंटेंट को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना किसी निगरानी के आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध है, जिससे सामाजिक मूल्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार इस दिशा में कोई सख्त नीति बनाने जा रही है या नहीं। किसान मुद्दों को लेकर सपा विधायक अतुल प्रधान ने अनोखा विरोध दर्ज कराया। वे गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे और कहा कि किसान दिवस के दिन भी किसानों की समस्याएं नजरअंदाज की जा रही हैं। उन्होंने गन्ना मूल्य भुगतान और खेती से जुड़ी दिक्कतों पर चर्चा की मांग की।

निजी स्कूलों की मनमानी पर भी सदन में सवाल उठे। सपा विधायक आर.के. वर्मा ने कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों से मनचाही फीस वसूल रहे हैं। आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश देने में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार निजी स्कूलों पर सख्त नियम लागू करे।
शिक्षकों की भर्ती को लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सपा विधायक सचिन यादव ने कहा कि प्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली हैं। हर साल हजारों शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं की जा रही। इससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी स्कूल को बंद नहीं किया गया है। छात्रों की संख्या कम होने पर पास-पास के स्कूलों को जोड़ा गया है, जिससे शिक्षकों और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि खाली पड़े स्कूल भवनों में बाल वाटिका चलाई जा रही हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई है और उनके स्वास्थ्य के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है।
