SIR और IAF 2025: यानि राष्ट्रीय सुरक्षा का मास्टरस्ट्रोक

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  • SIR और IAF का खतरनाक कॉम्बिनेशन,
  • बंगाल के घुसपैठियों में IAF 2025 का ख़ौफ़,
  • Immigration and Foreigners Act 2025: भाग जाओ या जेल जाओ,

रंजन कुमार सिंह

जो भगदड़ पश्चिम बंगाल में अभी मची हुई है उसके पीछे सिर्फ SIR नहीं है बल्कि IAF 2025 वाले कानून का गृहमंत्री अमित शाह का डंडा है। और मजेदार बात यह है कि देश में जब राहुल गांधी वोट चोरी की नौटंकी में व्यस्त थे, मोर्चों पर दिखावा कर रहे थे, तब मोटा भाई यानी अमित शाह ने अपनी चाल चुपचाप चल दी। उन्होंने ऐसा कानून बनाया कि घुसपैठियों के लिए कोई भी बचने का रास्ता न बचे। IAF 2025 अब भारत में अवैध घुसपैठियों के मन में डर का बीज बो देगा। इस नए कानून ने पुराने चारों कानूनों को रिप्लेस कर दिया है और लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार के नियंत्रण में आ गया है। अब कोई राज्य सरकार चाहे कितना भी षडयंत्र कर ले, घुसपैठियों को बचाना और भारत में बसाए रखना नामुमकिन है। इस कानून में बिना वैध पासपोर्ट या वीज़ा के भारत में प्रवेश करने वाले घुसपैठियों को 5 साल की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना है। अगर किसी ने फर्जी दस्तावेज़ बनाए हैं, तो जुर्माना बढ़कर 10 लाख और साथ डिपोर्टेशन। एयरलाइन्स, होटल, यूनिवर्सिटी, अस्पताल सभी अब विदेशी नागरिकों की जानकारी केंद्र सरकार को देंगे। विदेशी नागरिकों की निगरानी, पंजीकरण और ओवरस्टे की जानकारी अब सेंट्रल मशीनरी के हाथ में है।

यानी अब भारत ‘धर्मशाला’ नहीं है, जहां कोई भी बिना वैध दस्तावेज़ के घुस आए और देश में अपने हिसाब से नारे बाजी करे या बंटवारे की बात करे। वही घुसपैठिये जो पश्चिम बंगाल में भाग रहे हैं, वे यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि SIR केवल वोटर लिस्ट से नाम हटाएगा, लेकिन अगर उनका नाम कट गया और वे वास्तव में विदेशी हैं, तो IAF 2025 उन्हें सीधे पकड़ लेगा। ममता दीदी का भौंकाल वह उन्हें बचा नहीं पाएगा। क्योंकि नागरिकता का मामला अब पूरी तरह केंद्र का मामला है। साफ़-साफ़ कहें तो अब जो घुसपैठी बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से आए हैं और हिंदू, सिख, जैन, पारसी या ईसाई हैं, वे CAA के तहत सुरक्षित हैं। लेकिन बाकी सभी भगदड़ में हैं, डर के मारे भाग रहे हैं। यह कानून Immigration and Foreigners Act, 2025 (IAF 2025) वास्तव में गेम-चेंजर है। बहुत से लोगों को लगता है कि SIR का मतलब केवल “वोटर आईडी कटना” है, लेकिन असल डर उस कानूनी कार्रवाई का है जो वोटर लिस्ट से बाहर होते ही शुरू हो सकती है।

डर के असली कारण क्या हैं?:

SIR और IAF 2025 का खतरनाक “कॉम्बिनेशन”। यह बात सही है कि SIR (Special Intensive Revision) का काम सिर्फ पहचान करना है और यह चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जो केवल यह तय करती है कि कौन वोटर है और कौन नहीं। अगर कोई फेल होता है, तो उसका नाम कट जाएगा। लेकिन असली डर का कारण यह IAF 2025 है। डर यहाँ से शुरू होता है। जैसे ही किसी का नाम वोटर लिस्ट से कटता है और वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता, वह स्वतः ही ‘विदेशी’ (Foreigner) की श्रेणी में आ सकता है। और यहीं पर सितंबर 2025 से लागू हुआ नया और सख्त कानून अपना काम शुरू कर देगा। यह IAF 2025 मार्च 2025 में संसद द्वारा पास और सितंबर से लागू यह कानून पुराने ‘Foreigners Act, 1946’ और ‘Passport Act, 1920’ जैसे कानूनों को निरस्त (Repeal) कर लाया गया है। घुसपैठियों के लिए यह डर का कारण इसलिए है क्योंकि इसमें सजा के प्रावधान बेहद सख्त हैं। पहले (1946 के कानून के तहत) अगर कोई पकड़ा जाता था, तो कानूनी प्रक्रिया लंबी और लचर होती थी। कई बार वे जमानत पर छूट जाते थे। लेकिन IAF 2025 में अब नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति पर है, न कि सरकार पर।

Immediate Arrest: अगर SIR में नाम कटा और नागरिकता के सबूत नहीं मिले, तो पुलिस सीधे IAF 2025 की धारा लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। ₹5-10 लाख का जुर्माना भरना बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए लगभग असंभव होगा, जिसका सीधा मतलब है—लंबी जेल।

CAA का सुरक्षा कवच

यह डर उन लोगों के लिए नहीं है जो CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के दायरे में आते हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों के पास CAA के तहत नागरिकता लेने का विकल्प है। इसलिए IAF 2025 की तलवार मुख्य रूप से उन घुसपैठियों पर लटक रही है जो इस सुरक्षा कवच से बाहर हैं। दरअसल SIR तो बस एक जाल है, असली शिकारी IAF 2025 है। घुसपैठिये यह समझ चुके हैं कि अगर वे वोटर लिस्ट से बाहर हुए, तो वे अब भारत में ‘अदृश्य’ रहकर नहीं जी सकते। ₹10 लाख का जुर्माना और जेल की चक्की पीसने से बेहतर वे “भाग जाना” समझ रहे हैं। यह स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) का एक सोचा-समझा ‘मास्टरस्ट्रोक’ है।

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