पटना। ऐतिहासिक गांधी मैदान पर जब नीतीश कुमार दसवीं बार बतौर मुख्यमंत्री शपथ ले रहे थे तब तक बिहार में काफी कुछ बदल चुका था.. इस बार मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी थे पर वे अपने राजनीतिक पदार्पण पर सवालों से बचते रहे.. निशांत कुमार ने महज ये कहा कि बिहार ने जो “ऐतिहासिक जनादेश” दिया है उसके लिए … धन्यवाद । निशांत कुमार ने कहा कि बिहार की जनता को धन्यवाद और शुभकामनाएं। मैं दिल से आभार और बधाई व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से लोगों ने काम किया, जिस तरह महिलाओं ने मतदान किया हम उनको भूल नहीं सकते। आज हम जो हैं उसमें मातृ शक्ति का विशेष योगदान है और ये दिन बिहार की ऐतिहासिक तारीख है… खैर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार शपथ ग्रहण कर लिया है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके बाद सम्राट चौधरी ने मंत्री पद की शपथ ली वे दूसरी बार बिहार के डिप्टी सीएम बने हैं।
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अब बात करते हैं चुनावी नतीजों की तो सही मायनें में बिहार ने एक लंबी लकीर खींच दी हॉ.. इसका पूरा श्रेय जाता है सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार को…। नीतीश के चेहरे का ही कमाल था कि बिहार के नतीजों ने बता दिया कि इस बार NDA के पक्ष में Land Slide हो रही है और बीजेपी बड़े भाई के रूप में स्थापित होते दिख रही है.. इस बार नीतीश की जीत का सेहरा महिला वोटरों को ही मिलना चाहिए.. उनका वोट प्रतिशत पिछली बार से करीब 10 फीसदी ज्यादा रहा और ये कमाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला रोजगार योजना का है जिसके तहत महिलाओं के खाते में एक-मुश्त दस हजार की सहायता राशि डाल दी गयी।
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NDA ने चुनाव जीता पर सब जानते हैं कि इसमें असल खेला नीतीश बाबू का ही हैष सियासत के माहिर नीतीश ने जब विधानसभा क्षेत्र हाटा में महिला वोटरों को साधने के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला था तब किसी को अंदाजा नहीं थी कि ये दांव बिहार की दशा और दिशा बदलने वाला साबित होगा। नीतीश कुमार ने उस वक्तक कहा था कि अब बिहार की महिलाओं को महिला रोजगार योजना के तहत मिली दस हजार की सहायता राशि को लौटाना नहीं पड़ेगा। इसे पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच से कहा कि यह राशि महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए दी गई थी और अब इसे वापस करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ये नीतीश का मास्टरस्ट्रोक था जिसने बिहार की आधी आबादी को समझा दिया कि वे महिलाओं की दशा बदल चुके हैं और वक्त मिला तो बिहार की तस्वीर बदल जाएगी। दरअसल सत्ता के पारखी नीतीश जानते थे कि यही महिलाएं किसी भी राजनैतिक दल के लिए साइलेंट किलर बन सकती हैं तो किसी भी दल को सत्ता की चाबी भी थमा सकती हैं। वैसे बिहार में शराबबंदी लागू करने के चलते नीतीश कुमार की महिलाओं में लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। ऐसे में अगर नतीजे एनडीए के पक्ष आए तो यह नीतीश कुमार के दस हजार के Top Up का ही कमाल है और यही महिलाएं उन्हें एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बन रही हैं यानि दसवीं बार नीतीशे सरकार…।
