DIG के शिथिल नियंत्रण से स्थानांतरित नहीं हो पा रहे सिद्धदोष बंदी!

  • 166 सिद्धदोष बंदियों में 67 का अभी तक नहीं हुआ जेल स्थानांतरण
  • आगरा परिक्षेत्र DIG  ने दिया शत प्रतिशत बंदियों के स्थानांतरण का निर्देश
  • निर्देशों के उल्लंघन पर अधीक्षक पर कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे DIG

लखनऊ। आगरा परिक्षेत्र के DIG  जेल के शिथिल नियंत्रण की वजह से एटा जेल से सिद्धदोष बंदियों का केंद्रीय कारागार स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। वर्तमान समय में एटा जेल में करीब 166 सिद्धदोष बंदी है जिन्होंने जेल में सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके है। इन बंदियों में अब तक सिर्फ 65 बंदियों को ही केंद्रीय कारागार भेजा जा सका है। ऐसा तब है जब परिक्षेत्र के डीआईजी जेल ने अधीक्षक को एक से सप्ताह के अंदर दो बार सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके सिद्धदोष बंदियों को शत प्रतिशत स्थानांतरित करने का निर्देश दे चुके है। दिलचस्प बात तो यह है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाली दबंग अधीक्षक के खिलाफ कार्यवाही करने की डीआईजी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बीती 20 सितंबर 25 को आगरा जेल परिक्षेत्र के DIG पीएन पांडेय ने परिक्षेत्र की समस्त जेल अधीक्षकों को एक पत्र जारी किया। इस पत्र में कहा गया कि सात वर्ष की सजा काट चुके सिद्धदोष बंदियों को शीघ्र केंद्रीय कारागार स्थानांतरित किया जाए। निर्देश में उन्होंने कहा कि कारागारों में निरुद्ध सात वर्ष से अधिक की सजा के सबसे पुराने कम से कम 30 सिद्धदोष बंदियों को चिन्हित कर इनका स्थानांतरण केंद्रीय कारागार में 21 सितंबर 25 तक करना सुनिश्चित किया जाए। स्थानांतरित किए गए बंदियों की सूची परिक्षेत्र कार्यालय के साथ कारागार मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

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सूत्रों का कहना है कि इस निर्देश के अनुपालन में एटा जेल अधीक्षक क्रमवार छोड़कर बेतरतीब तरीके से 07 वर्ष को सजा काट रहे 30 सिद्धदोष बंदियों की सूची तैयार कराई। इसमें सिर्फ 15 बंदियों को ही केंद्रीय कारागार स्थानांतरित किया गया। इसमें अधीक्षक ने सुरक्षा गार्ड नहीं मिलने का हवाला देते हुए 15 बंदियों को रोक लिया। बंदियों की संख्या और अधीक्षक की तानाशाही और निर्देशों का अनुपालन नहीं होने पर परिक्षेत्र के डीआईजी ने एक दिन बाद ही 22 सितंबर 25 को एक बार फिर ऐसा ही एक और आदेश जारी किया। इस आदेश में निर्देश दिया गया कि सात वर्ष की सजा काट रहे शत प्रतिशत बंदियों को जल्दी से जल्दी केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया जाए। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेल में बंद 166 सिद्धदोष बंदियों में 21 सितंबर को 15, 24 सितंबर को 15, 25 सितंबर को 19 और 28 सितंबर को 50 बंदियों को केंद्रीय कारागार स्थानांतरित किया गया। डीआईजी के शत प्रतिशत स्थानांतरण के निर्देश के बाद भी 67 सिद्धदोष बंदियों को अभी तक केंद्रीय कारागार नहीं भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि महानिदेशक कारागार ने 30 जून को जेलों में ओवर क्राउडिंग की समस्या को दूर करने के लिए ऐसा ही एक आदेश जारी किया था। एटा जेल अधीक्षक के लिए परिक्षेत्र डीआईजी का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। उधर मामले में कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान समेत अन्य आला अफसरों ने भी चुप्पी साध रखी है।

कार्यवाही के बजाए वसूली में हो जाती बढ़ोत्तरी!

आगरा परिक्षेत्र की जेलों में भ्रष्टाचार व अवैध वसूली के उजागर हुए मामलों में कार्यवाही हो या न हो लेकिन परिक्षेत्र के मुखिया का लिफाफा जरूर मोटा हो जाता है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व में इस जेल से परिक्षेत्र मुखिया को हर माह छोटा लिफाफा मिलता था। जेलर और प्रभारी जेलर से विवाद होने के बाद यह रकम दो से तीन गुना कर दी गई है। आगरा जिला जेल में अधिकारियों की लूट का वीडियो वायरल होने और कांसगंज में सुरक्षाकर्मियों और बंदियों का उत्पीड़न होने का खुलासा होने के बाद भी परिक्षेत्र कार्यालय और कारागार मुख्यालय ने कोई कार्यवाही नहीं की गई। कार्यवाही नहीं होने से अधिकारी बेलगाम हो गए है। इसके साथ ही आला अफसरों की वसूली राशि में बढ़ोत्तरी जरूर हो गई है। परिक्षेत्र डीआईजी के निर्देशों का पालन हो न हो आदेश जारी करते रहते है।

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