एक वरिष्ठ पत्रकार की वाल से-

ADG सुजीत पाण्डेय की कहानी

यह तस्वीर अपर पुलिस महानिदेशक सुजीत पाण्डेय जी की है। सुजीत जी सीनियर पुलिस अधिकारी है और लखनऊ के पुलिस कमिशनर भी रह चुके हैं। योगी जी को एक मामले में उनके बारे में पता चला था तो उन्होंने सुजीत पाण्डेय जी को लखनऊ से ही बाहर कर दिया था। सीतापुर में लम्बे समय तक रहने के बाद एक बार फिर लखनऊ वापसी हुई ADG PAC के पद पर। महानगर में मुख्यालय है पीएसी का। सुजीत पाण्डेय जी से उनके दफतर में कोई मुलाकात नहीं कर सकता है जब तक वह खुद न बुलाये चाहे वह विधायक हो नेता हो या फिर आम पब्लिक।

आप सोचिये इतना बड़ा पुलिस बल है तो मातहत कर्मचारी कैसे मिल पाते होंगे उनसे। फोन वह उठाते नहीं चाहे CUG हो या पर्सनल नंबर। पर्सनल तो वायस मेल पर चला जाता है जबकि सरकार की तरफ से दिया गया CUG नम्बर वह खुद नहीं बल्कि उनका एक सिपाही उठाता है। वह नाम तो नोट तो कर लेता है लेकिन वापसी में कोई जवाब नहीं आता कि फोन करने वाले का सन्देश उन तक पहुँचा भी या नहीं। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कई बार निर्देश दिया है कि CUG फोन खुद अधिकारी उठायें और पब्लिक और जन प्रतिनिधियों से 10 से 11 जरूर मिले। जब वह फोन नहीं उठाएंगे तो बात नहीं होगी तो बुलाएँगे कैसे किसी को।

अब मैं आज की आपको घटना बताता हूँ। आजमगढ़ से आये एक साहब सुजीत पाण्डेय जी को कई बार पर्सनल नंबर और CUG पर कई बार फोन करते हैं। पर्सनल फोन तो वायस मेल में चला जाता है जबकि CUG सिपाही उठाता है नाम नोट कर लेता है लेकिन वापसी में जवाब नहीं आता। तब उनसे मिलने के लिये उनके दफतर साढ़े दस बजे जाते हैं। कुछ देर बाद ADG साहब अपने दफतर में आ जाते हैं। दफ्तर में वेटिंग रूम में बैठ जाते है लेकिन जो दरोगा जी होते हैं वह मुलाकात की उनकी स्लिप नहीं लेते हैं।

रोगा जी कहते हैं हम किसी की पर्ची नहीं लगा सकते। जिसकी साहब से फोन पर बात हुई होगी उनको वह बुलाएँगे तब आप मिल सकते हैं। वेटिंग रूम में कुछ और लोग बैठे थे जिनको दारोगा जी विधायक बता रहे थे। उनकी भी पर्ची नहीं लगाई जा रही थी। दारोगा जी कह रहे थे अगर आपकी बात हुई होगी तो साहब खुद बुलाएँगे। उन साहब ने कई बार पर्ची लगाने का आग्रह किया लेकिन दारोगा जी ने कहा कि सर पर्ची लगाने पर साहब गाली देते हैं। आप बात कर लीजिये फोन पर आपको बुलाना होगा तो बुला लेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के साथ ही आज सुबह गोरखपुर में पब्लिक से मिले है लेकिन लखनऊ में बैठे पुलिस अफसर पब्लिक और जनप्रतिनिधि किसी से नहीं मिल रहे हैं।

योगी जी ध्यान दीजिये इस पर।

कोई भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि या फिर मातहत अपनी समस्या लेकर ही अफसर से मिलता है। उस अफसर की समस्या होती है तो वह भी अपने अफसरों के पास जाकर बात करता है। सुजीत पाण्डेय जी को जब योगी जी ने लखनऊ से सीतापुर भेज दिया था तो लखनऊ वापसी के लिए अक्सर DGP दफतर में संबन्धित अफसरों के यहाँ खुद दौड़ लगाते नज़र आते थे। उनकी तो लखनऊ वापसी हो गई अब जनप्रतनिधि और पब्लिक के लिए उनके पास समय नहीं है। आप सोचिये मातहत अफसर और छोटे कर्मचारी कैसे मुलाकात करके अपनी बात कह पते होंगे।

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