दो टूकः OPS की हो रही मांग और सरकार ने दे दिया UPS

राजेश श्रीवास्तव

पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर देश के सरकारी कर्मचारी लंबे समय से आंदोलनरत थे। इसी बीच शनिवार को मोदी सरकार अचानक पुरानी पेंशन का नया स्वरूप लेकर आ गयी है। हालांकि इसकी चर्चा पिछले तीन-चार दिनों से हो रही थी कि सरकार इस दिशा में कोई बड़ा ऐलान करेगी। लेकिन जिस स्वरूप में इसका ऐलान हुआ है, उसके बाद से कई अहम सवाल भी सुरसा की तरह मुंह बाये खड़े हुए हैं। पहला तो यह है कि इसको सारे राज्य लागू करेंगे, इस पर भी संदेह है क्योंकि इसके लिए उनको भारी भरकम बजट चाहिए। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन भी इसको लेकर आक्रोशित हैं उनका कहना है कि नयी पेंशन स्कीम हमको मंजूर नहीं है, हम OPS को लेकर आंदोलन करेंगे। लंबे समय तक पुरानी पेंशन बहाली के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने वाले ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिह पटेल कहते हैं कि सरकार ने OPS लाकर कर्मचारियों के साथ छल किया है।

केंद्र सरकार ने शनिवार को नई पेंशन व्यवस्था लागू करने की बात कही है। इस स्कीम को नाम भी नया दे दिया गया है। मतलब, यह नाम OPS और NPS से जुदा है। नई स्कीम का नाम यूनिफाइड पेंशन स्कीम ‘UPS’ रखा गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस स्कीम को मंजूरी भी दे दी है। इस स्कीम में 25 साल काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरी पेंशन मिलेगी। यानी किसी कर्मचारी ने न्यूनतम 25 साल तक नौकरी की है तो उसे रिटायरमेंट के तुरंत पहले के अंतिम 12 महीने के औसत वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। यूनिफाइड पेंशन स्कीम में 10 साल की नौकरी करने के बाद कर्मचारी को कम से कम 10 हजार रुपये पेंशन के तौर पर मिलेंगे।

इसी को लेकर केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने नई पेंशन स्कीम ‘UPS’ पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा, ये सरकार ने कर्मचारी वर्ग के साथ छल किया है। किसी भी सूरत में UPS मंजूर नहीं होगा। वे गारंटीकृत ‘पुरानी पेंशन बहाली’ के लिए दोबारा से हल्लाबोल की तैयारी में जुट गए हैं। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्यों के कर्मचारी संगठन, जो OPS के लिए आंदोलन कर रहे थे, वे जल्द ही अपनी आगामी रणनीति का खुलासा करेंगे।

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दरअसल कर्मचारी आंदोलन करने की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि UPS में सरकार ने अपने कंट्रीब्यूशन, जो अभी तक 14 प्रतिशत था, उसे बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत कर दिया है। यहां तो सब ठीक है। यह बात काबिले तारीफ भी है, लेकिन रिटायरमेंट पर 50 प्रतिशत बेसिक सेलरी और डीए अलाउंस के बराबर की थी, न कि कंट्रीब्यूशन घटाने या उसे बढ़ाने की। कर्मचारियों की डिमांड यह रही है कि उनका पैसा, रिटायरमेंट पर बिल्कुल जीपीएफ की तरह ही उनको वापस कर दिया जाए। सरकार, नई व्यवस्था ‘UPS’ में वह सारा पैसा ले लेगी। यानी कर्मचारियों का 10 प्रतिशत भी और खुद का 18.5 परसेंट भी। लिहाजा अपने वाले कंट्रीब्यूशन में से केवल आखिरी के छह महीना की सैलरी जितनी बनेगी, सरकार उतना ही कर्मचारियों को वापस करेगी। ऐसी स्थिति में तो UPS की बजाए, NPS ज्यादा बढ़िया होगा। आंदोलन OPS के लिए था, सरकार ने पुरानी पेंशन जैसा कोई भी प्रावधान UPS में शामिल नहीं किया है, इसलिए कर्मचारी अपना आंदोलन जारी रखने की बात कर रहे हैं।

सरकार ने OPS को लेकर कोई भी सकारात्मक बयान नहीं दिया। सरकार अपनी बात पर ही अड़ी रही। नतीजा, सरकार ने OPS पर आंदोलन करने वाले कर्मचारी संगठनों की राय लिए बिना ही UPS को लागू करने की बात कह दी। अब अगर कर्मचारी दोबारा से इसको लेकर आंदोलन शुरु करें तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। यदि सरकार NPS से UPS का विकल्प दे सकती है तो फिर OPS का विकल्प देने में सरकार को क्या दिक्कत है।

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यदि UPS में बेसिक का 50 प्रतिशत दे सकते हैं तो OPS में भी 50 प्रतिशत ही तो देना होता है। नाम बदलने से काम नहीं बदलता। यह जितनी भी योजनाएं लाई जा रही हैं, सभी स्कीम हैं। तभी तो रोज बदलना पड़ रहा है। अभी तक NPS की तारीफ की जा रही थी। अब UPS की, जबकि सच यह कि OPS ही सामाजिक सुरक्षा का कवच है। बुढ़ापे की लाठी है। इसीलिए देश के करोड़ों कर्मचारी OPS की ही मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार द्बारा लायी गयी नयी पेंशन योजना NPS सरकारी कर्मचारियों को लुभाने में कामयाब हो पायेगी या नहीं, लेकिन जिस तरह के विरोध के स्वर बुलंद होते दिख रहे हैं, उससे लगता तो नहीं कि रिटायर्ड कर्मचारी मोदी सरकार का गुणगान करेंगे।

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