कारागार विभाग में स्थानांतरण नीति की उड़ी धज्जियां, तीन और छह माह पहले तैनात हुए अधीक्षकों को सौंप दी कमाऊ जेल

  • एक साल पहले तैनात अधीक्षक का तबादला, साढ़े तीन साल वाला आज भी बरकरार
  • नवनियुक्त अनुभवहीन अधीक्षकों को मिली संवेदनशील जेलों पर तैनाती

राकेश यादव

लखनऊ। प्रदेश कारागार विभाग के तबादलों में स्थानांतरण नीति के निर्देशों को जमकर धज्जियां उड़ाई गई। विभागीय अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के तबादलों में निर्धारित मानकों को दरकिनार कर दिया गया। तीन और छह माह पूर्व तैनात किए गए अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि एक ही जेल पर तीन साल से अधिक समय से जमें अधिकारी को हटाया ही नहीं गया। आलम यह रहा कि वरिष्ठ अधीक्षक की जेल पर अधीक्षक और अधीक्षक की जेल पर वरिष्ठ अधीक्षक तैनात कर दिए गए। दिलचस्प बात यह रही कि जेल परिक्षेत्र के कार्यालयों में 20-25 साल से जमें किसी भी बाबू को स्थानांतरित नहीं किया गया। ऐसा तब है जब लंबे समय से एक स्थान पर जमे यह बाबू बंदी रक्षकों का शोषण करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।

विभागीय जानकारों के मुताबिक केंद्रीय कारागार और मंडलीय कारागार में वरिष्ठ अधीक्षक, जिला जेलों में अधीक्षक और उप कारागार में जेलर तैनात किए जाने का प्रावधान है। सरकार की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि एक जनपद में तीन और मंडल में सात साल से तैनात लोगों को हटाया जाए। कारागार विभाग में स्थानांतरण नीति के ठीक विपरीत तबादले किए गए है। हकीकत यह है कि प्रमुख सचिव/महानिदेशक कारागार समेत अन्य अफसरों ने इस व्यवस्था को ध्वस्त करते हुए अनाप शनाप तरीके से तबादले कर दिए हैं।

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सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरण सत्र के अंतिम दिन से तीन दिन पहले विभाग को जारी तबादला सूची में इस सच को आसानी से देखा जा सकता है। 29 जून को अधीक्षक संवर्ग की जारी की गई तबादला सूची में करीब तीन माह पहले अंबेडकरनगर जिला कारागार में तैनात किए गए अधीक्षक को मथुरा जिला जेल पर स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रकार सिद्धार्थनगर जिला जेल पर तैनात अधीक्षक को मुजफ्फरनगर जिला जेल पर तैनात कर दिया गया। अनुभवहीन नवनियुक्त अधीक्षकों की संवेदनशील और कमाऊ जेल पर तैनाती विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी तरह एक साल पहले मेरठ जेल पर तैनात किए अधीक्षक को अंबेडकरनगर जिला जेल स्थानांतरित पर कर दिया गया। छह माह पूर्व प्रोन्नति के बाद गाजीपुर जिला जेल भेजे गए अधीक्षक को वरिष्ठ अधीक्षक वाली सहारनपुर जेल पर स्थानांतरित कर दिया गया। तीन, छह माह और एक साल पहले स्थानांतरित किए गए अधीक्षकों का तबादला तो कर दिया गया, किंतु करीब तीन साल से अधिक समय से रामपुर जिला जेल अधीक्षक को स्थानांतरण नीति में आने के बाद भी स्थानांतरित नहीं किया गया है।

विभाग में अनाप शनाप और बेतरतीब तरीके से हुए इन तबादलों ने प्रमुख सचिव/महानिदेशक कारागार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसको लेकर विभागीय अफसरों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि शासन में बैठे आला अफसर जांचों में दोषी ठहराए गए अफसरों को बचाने और चहेते अफसरों को मनमाफिक जेलों पर तैनात कराने की जुगत में लगे रहते है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव/डीजी जेल राजेश कुमार सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। निजी सचिव विनय सिंह ने साहब के व्यस्त होने की बात कहकर बात कराने से मना कर दिया।

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तबादले बदलने का सिलसिला बदस्तूर जारी

कारागार विभाग में अधिकारियों के तबादले बदलने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। प्रदेश सरकार के एक कद्दावर कैबिनेट मंत्री के करीबी कहे जाने वाले जेलर संजय कुमार शाही का तबादला मेरठ से गौतमबुद्धनगर जेल कर दिया गया है। इसी प्रकार एके शुक्ला को बाराबंकी से मेरठ जेल, जेपी तिवारी का गौतमबुद्धनगर से बाराबंकी जेल कर दिया गया। इससे पूर्व बांदा से झांसी स्थानांतरित किए गए जेलर मनीष कुमार को कानपुर नगर की जेल और मुरादाबाद से इटावा स्थानांतरित किए गए जेलर मृत्युंजय कुमार पांडेय को लखनऊ जिला जेल स्थानांतरित किया जा चुका है। यह बदलाव स्थानांतरण सत्र के अंतिम दिन 30 जून को किए गए हैं।

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