सियासी महासंग्राम: चुनावी दंगल विकास की परीक्षा, किसकी होगी नैया पार

पूर्वांचल: जातीय समीकरणों में उलझे समीकरण भाजपा के लिए सीट बचाने की चुनौती

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। पूर्वांचल में खासकर जनपद आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ व बलिया। इन जिलों के संसदीय सीटों में मानो इस समय सियासी महासंग्राम की धूम है।
समाजवादी गढ़ मानी जानी वाली सीट पर इस बार जातीय समीकरणों का जाल उलझा हुआ है।
आजमगढ़ में सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं, सपा ने भी एक बार फिर धर्मेंद्र यादव को टिकट देकर चुनावी समीकरण को बौखलाहट में डाल दिया है। उधर गाजीपुर जिले में भी भाजपा प्रत्याशी पारसनाथ राय और सपा से प्रत्याशी अफजाल अंसारी में टक्कर की बयार खूब बह रही है।
भाजपा पार्टी से उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ उपचुनाव का इतिहास दोहराने के साथ ही एक बार फिर आजमगढ़ लोकसभा सीट पर कब्जा करने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगाए हैं, सपा भी समीकरणों के सहारे बहूलता सीट पर नजर गड़ाए हुए है। बसपा असमंजस में है कि उसे जीत मिलेगी या फिर…
पिछले दिनों लोकसभा के उपचुनाव में दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सपा को पटखनी लगा संसद की दहलीज पर कदम रखा था, लेकिन जिस तरह से सोशल मीडिया पर लगातार चल रही बहस भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ के लिए डगर कठिन दिखती नजर आ रही है।
इसके अलावा पूर्वांचल में एक ऐसा जनपद गाजीपुर है जहां एक-दूसरे की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
भाजपा प्रत्याशी पारसनाथ राय और सपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी के बीच कांटे की टक्कर होती दिख रही है, लेकिन वहां की बहस इस बात की गवाही दे रही है कि भाजपा प्रत्याशी पारसनाथ राय के लिए यह महासंग्राम किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
वहीं मुलायम सिंह यादव के दौर में बागी बलिया कहे जाने वाली सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज सपा से उपचुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन कुछ दौर गुजरने के वे भाजपा का दामन थाम कर अब बलिया से ही लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

 

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