विधायकों के बाजार में बेदाग निकले कांग्रेस के विधायक

महराजगंज। हाल ही संपन्न राज्य सभा चुनाव में विधायकों के बाजार खूब सजे भी,खूब बिके भी।कहीं भाजपा के बिके तो कहीं सपा के तो कहीं कांग्रेस के विधायक बिक गए। ऐसे में यूपी के मात्र दो कांग्रेस विधायकों की ईमानदारी व निष्ठा की दाद देनी होगी। ये कांग्रेस विधायक हैं फरेंदा विधानसभा क्षेत्र के वीरेंद्र चौधरी और रामपुर खास की विधायक मोना मिश्रा। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए दस सदस्यों को चुना जाना था जिन्हें विधायक वोट करते। विधानसभा में विधायकों की संख्या के अनुसार सपा के दो और भाजपा के सात सदस्यों का चुना जाना तय था लेकिन भाजपा ने आठ उम्मीदवार तो सपा ने तीन उम्मीदवार मैदान में उतार दिए। सपा के जो आधा दर्जन से अधिक विधायक भाजपा की गोद में न बैठे होते तो अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए कांग्रेस के दो विधायकों के अलावा सपा को दो और विधायकों की जरूरत थी जबकि भाजपा के आठवें उम्मीदवार के जीतने की संभावना तनिक भी नहीं थी,यह जानते हुए भी भाजपा ने मुलायम सिंह द्वारा पैदा किए गए मशहूर बिल्डर संजय सेठ को भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया जो सपा से राज्यसभा सदस्य थे भी। इधर संजय सेठ उम्मीदवार हुए नहीं कि उधर लखनऊ में विधायकों की मंडी सज गई।

इस मंडी में सबसे पहले सपा के ही विधायक इधर से उधर हुए। सपा विधायकों के पाला बदलने से यह तय हो गया कि अब सपा के तीसरे उम्मीदवार पूर्व ब्यूरो क्रेट आलोक रंजन का हारना तय है,वे हार भी गए और भाजपा अपने आठवें उम्मीदवार संजय सेठ को सपा विधायकों के वोटों के बल पर जिता ले गई। जाहिर है संजय सेठ को  जिताने के लिए भाजपा अन्य विधायकों से भी संपर्क जरूर साधे होगी, इसमें कांग्रेस के दोनों विधायक भी हो सकते हैं।

कांग्रेस के इतने कम विधायक हैं कि यदि ये पाला बदल भी लिए होते तो इन पर दल-बल विधायक कानून भी नहीं लागू होता। बावजूद इसके कांग्रेस के दोनों विधायक वीरेंद्र चौधरी और मोना मिश्रा न केवल इंडिया एलायंस के साथ डटी रहीं,सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ चलकर एलायंस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान भी किया। गौरतलब है कि इस चुनाव में वोटरों को अपना वोट दिखाना भी पड़ता है ताकि पता चले कि क्राश वोटिंग तो नहीं हुई? बहरहाल हिमाचल प्रदेश में जहां कांग्रेस के छः विधायक इधर से उधर हो गए वहीं यूपी के दोनों कांग्रेस विधायकों का अपनी पार्टी के साथ खड़ा रहना बड़ी बात है। ऐसा करके पार्टी के दोनों विधायक कांग्रेस की कसौटी पर खरा उतरे ही, अखिलेश यादव का भी दिल जीतने में कामयाब हो गए। सपा का तीसरा उम्मीदवार सपा विधायकों के पाला बदलने से भले ही हार गया लेकिन अखिलेश ने कांग्रेस के दोनों विधायकों का हृदय से धन्यवाद किया।

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