दुर्गा सप्तमी 2026: मां कालरात्रि की पूजा, महत्व और पौराणिक कथा जानें

Durga Saptami

Durga Saptami: शारदीय नवरात्रि में सप्तमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मकता और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं। दुर्गा पूजा मनाने वाले कई क्षेत्रों में महासप्तमी से देवी की भव्य पूजा और उत्सव की शुरुआत होती है।

दुर्गा सप्तमी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के सातवें दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। वर्ष 2026 में दुर्गा सप्तमी की तारीख और पूजा का मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित होगा। दुर्गा पूजा की परंपराओं में महासप्तमी के दिन नवपत्रिका स्नान और देवी की विशेष पूजा का भी महत्व है।

ये भी पढें

शिवा शर्मा हत्याकांड: वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बता रही इनामी श्रद्धा दुबे

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का उग्र और शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही भय उत्पन्न करने वाला दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वे शुभ फल देने वाली देवी हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा संकटों से रक्षा की कामना करते हैं।

महासप्तमी पर किए जाते हैं ये प्रमुख अनुष्ठान

दुर्गा सप्तमी के दिन सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जाता है। इसके बाद फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित कर मंत्रों का जाप किया जाता है।

 

शारदीय नवरात्रि 2026 : किस दिन किस देवी की पूजा करें? जानें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का महत्व

बंगाल सहित कई क्षेत्रों में महासप्तमी पर नवपत्रिका स्नान की परंपरा है। इसमें नौ प्रकार के पौधों को एक साथ बांधकर स्नान कराया जाता है। इसे प्रकृति और देवी शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसके बाद पूजा पंडालों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करते हैं।

मां कालरात्रि और रक्तबीज की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्तबीज नामक राक्षस को वरदान मिला था कि उसके रक्त की हर बूंद धरती पर गिरने से उसके जैसा एक नया राक्षस पैदा हो जाएगा। देवी जब उस पर प्रहार करती थीं, तो उसके रक्त से अनेक राक्षस उत्पन्न हो जाते थे।

रक्तबीज के खून की हर बूंद से पैदा होता था नया असुर, मां काली ने ऐसे किया अंत

तब देवी ने कालरात्रि का उग्र रूप धारण किया। कथा के अनुसार, उन्होंने रक्तबीज के रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया, जिससे उसका अंत संभव हुआ। यह कथा बुराई पर शक्ति और साहस की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

भगवान राम से जुड़ी है अकाल बोधन की कथा

एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए शरद ऋतु में मां दुर्गा का आह्वान किया था। देवी की पूजा के इस असामयिक आयोजन को ‘अकाल बोधन’ कहा जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा की आराधना से श्रीराम को विजय का आशीर्वाद मिला।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

ये भी पढें

इनसाइट इग्निशन 4.0: 28 अक्टूबर को जुटेंगे मीडिया और मार्केटिंग दिग्गज

योगी सरकार में खिलाड़ियों को नौकरी, ‘पदक लाओ, पद पाओ’

रामायणम् ट्रेलर रिलीज, रणबीर बने राम और यश रावण

 

 

Spread the love

Bhanu Saptami 2026
homeslider Religion

भानु सप्तमी कल: जानें सूर्य देव की पूजा विधि और महत्व

Bhanu Saptami 2026: भानु सप्तमी हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना का एक अत्यंत पवित्र और फलदायी दिन माना जाता है। जब भी हिंदू पंचांग की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उस अद्भुत संयोग को ‘भानु सप्तमी’ कहा जाता है (चूंकि ‘भानु’ सूर्य देव का ही एक नाम है)। इसे ‘सूर्य […]

Spread the love
Read More
Ramayan Katha
homeslider Religion

मंथरा ने क्यों दिलाया था राम को वनवास? जानिए पूर्व जन्म की कथा

Ramayan Katha: रामायण में मंथरा का नाम आते ही उस दासी की छवि सामने आती है, जिसने कैकेयी के मन में ऐसा विचार डाला कि भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मिला और भरत के लिए राजगद्दी की मांग उठी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मंथरा ने आखिर श्रीराम के प्रति विरोध का […]

Spread the love
Read More
Lucknow
homeslider Religion

आरती के बाद क्यों बोलते हैं ‘कर्पूरगौरं’ मंत्र? जानें महत्व

Lucknow: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और आरती का विशेष महत्व है। मंदिरों से लेकर घरों तक, देवी-देवताओं की आरती के बाद अक्सर ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ मंत्र का उच्चारण किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस स्तुति में उनकी दिव्यता, करुणा और संसार के प्रति उनके व्यापक स्वरूप का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, […]

Spread the love
Read More