दुनिया में पांचवें सबसे बड़े रक्षा खर्च वाले देशों में शामिल हुआ भारत

Increase in India's defense budge

Increase in India’s defense budget :  भारत के रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है और वर्ष 2025 में यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। स्वीडन की प्रतिष्ठित रक्षा अध्ययन संस्था सिपरी (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की नवीनतम इयरबुक 2026 में यह खुलासा किया गया है कि भारत ने वर्ष 2025 में अपनी सेना और रक्षा आवश्यकताओं पर लगभग 90 अरब डॉलर का खर्च किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह खर्च पिछले वर्ष 2024 की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के साथ भारत दुनिया में सैन्य साजो-सामान और रक्षा बजट पर सबसे अधिक खर्च करने वाले देशों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती रणनीतिक जरूरतों, सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य ढांचे के विस्तार को दर्शाता है। SIPRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर कई देशों ने हाल के वर्षों में अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है, लेकिन भारत की वृद्धि दर उल्लेखनीय मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी न केवल सीमाई सुरक्षा चिंताओं के कारण है, बल्कि देश की सैन्य आधुनिकीकरण नीति और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति का भी हिस्सा है।

भारत लंबे समय से अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर जोर देता आ रहा है। इसमें नए लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, नौसेना के युद्धपोत और उन्नत तकनीक वाले रक्षा उपकरणों की खरीद और विकास शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और विदेशी निर्भरता को कम किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि भारत का रक्षा बजट आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है, क्योंकि देश लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में निवेश कर रहा है। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष रक्षा जैसे नए क्षेत्रों में भी खर्च बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का बढ़ता रक्षा बजट क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में उसकी भूमिका को और मजबूत करता है। यह कदम न केवल देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ बनाता है। हालांकि, बढ़ते रक्षा खर्च को लेकर आर्थिक संतुलन और अन्य विकासात्मक क्षेत्रों पर असर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होती रहती है। इसके बावजूद सरकार का फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं के विस्तार पर लगातार बना हुआ है। कुल मिलाकर, SIPRI की यह रिपोर्ट भारत की सैन्य शक्ति में लगातार हो रहे विस्तार और वैश्विक रक्षा परिदृश्य में उसकी बढ़ती भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

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