बंगाल में शुभेंदु को दरकिनार करना BJP को पड़ सकता है भारी

Untitled 3 copy
  • बंगाल में लोगों को जातियों में बांटने और सबका विश्वास जीतने की नीति BJP को 2029 में भुगतनी होगी,

रंजन कुमार सिंह

जिस तरह से विलम्ब हो रहा है, उससे अब आशंका बढ़ रही है कि शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री न बनाने या फिर उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री भी लादने की तैयारी न हो रही हो। यह बहुत ही दुखद बात होगी। मुख्यमंत्री पद तो शुभेंदु अधिकारी को मिलना ही चाहिए, पर साथ गृह मंत्रालय भी उन्हीं के पास उनकी पसंद के ही किसी विधायक के पास रहना चाहिए। तभी बंगाल में कानून व्यवस्था सुधर पाएगी और उप्र व असम के समान वास्तविक बदलाव हो पाएगा। अन्यथा बहुत संभव है कि मुख्यमंत्री को परेशान करते रहने के लिए दो उपमुख्यमंत्री उनके सिर पर तैनात कर दिए जाएँ और प्रदेश की सरकार केन्द्रीय रिमोट से ही संचालित होती रहे। उड़ीसा या मप्र जैसे राज्यों की बात अलग है, पर बंगाल, असम और पंजाब बहुत संवेदनशील सीमावर्ती प्रदेश हैं। वहाँ ऐसे मजबूत और निडर मुख्यमंत्री बहुत जरूरी हैं, जो खुलकर काम कर सकें, और जिनकी विपक्ष के साथ निजी खुन्नस भी हो। असम में सुधार का एक बड़ा कारण यही है।

ये भी पढ़े

हार के बाद ममता के लिए एक और टेंशन

पंजाब में भी BJP की सरकार जल्दी ही बनेगी, तब पंजाब की बात करूंगा, पर बंगाल में कांग्रेस, लेफ्ट और ममता के दशकों के कुशासन के बाद पहली बार BJP को जो मौका मिला है, उसे आपसी वैमनस्य और गुटबाजी में गंवाया न जाए। इतना ही चाहता हूँ। एक महत्वपूर्ण बात और भी है, जिस पर सबका ध्यान जाना चाहिए। बंगाल का चुनाव परिणाम केवल ममता और तृणमूल की हार नहीं है। यह भाजपा के लिए एक बड़ा संदेश भी है कि लोगों को जातियों के नाम पर बांटने या सबका विश्वास जीतने के लिए छटपटाना समझदारी नहीं है। बंगाल के लोगों ने यह बता दिया है कि भाजपा का वास्तविक वोट बैंक कोई एक जाति या कोई अगड़ा-पिछड़ा समाज नहीं है, बल्कि सारे हिन्दू एकजुट रहकर भाजपा को मजबूत करना चाहते हैं। अन्यथा असम या बंगाल दोनों में ही इतनी सीटें कभी नहीं मिल सकती थीं।

ये भी पढ़े

BJP की ‘वोट चोरी’ के खिलाफ क्यों कोई ‘जेपी-अन्ना’ सामने नहीं आता

मैं जानता हूँ कि सरकार बनाने के बाद अगले साल दो साल में ही भाजपा बंगाल में भी मुफ्तखोरी और जातिवाद की नीतियां शुरू कर देगी। मैं यह भी जानता हूँ कि जल्दी ही तृणमूल के अधिकांश लोग रातों-रात खुद को संघ का स्वयंसेवक घोषित करके अधिकांश पद और ठेके हथिया लेंगे और BJP सरकार में मौज करेंगे। असली वोटर और सच्चे कार्यकर्ता हमेशा की तरह दुत्कारे जाएंगे। लेकिन भाजपा नेताओं को आज न कल इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी। अपने ही लोगों की उपेक्षा करके और अपने ही वोट बैंक को आपस में लड़वाकर अंततः अपना ही नुकसान करेंगे। इस बात को याद रखिए कि 2029 अब ज्यादा दूर नहीं है। इस बार बंगाल के चुनाव को पूरे देश के लोगों ने बहुत ध्यान से देखा है। इतने स्पष्ट बहुमत के बावजूद यदि भाजपा वहाँ भी अपनी गलत और जातिवादी नीतियों को आगे बढ़ाती है तो लोग सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि देश भर में इसका गुस्सा 2029 में उतारेंगे। वो नुकसान बहुत भारी पड़ेगा।


नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

BJP की ‘वोट चोरी’ के खिलाफ क्यों कोई ‘जेपी-अन्ना’ सामने नहीं आता

हार के बाद ममता के लिए एक और टेंशन

Untitled 4 copy
Analysis homeslider

बिखरते सियासी किलों के बीच इंडिया गठबंधन के अस्तित्व को बचाने की बड़ी चुनौती

भारतीय राजनीति के फलक पर 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों ने एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिसने विपक्षी एकजुटता के दावों और ‘इंडिया’ गठबंधन के भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। चुनावी मैदान के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि गठबंधन के भीतर की गहरी दरारों […]

Read More
ममता
homeslider National Politics West Bengal

हार के बाद ममता के लिए एक और टेंशन

TMC की बैठक में नहीं पहुंचे 10 विधायक नया लुक ब्यूरो पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आत्ममंथन शुरू हो गया है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी के 80 में 70 विधायक […]

Read More
Untitled 1 copy
Analysis homeslider

BJP की ‘वोट चोरी’ के खिलाफ क्यों कोई ‘जेपी-अन्ना’ सामने नहीं आता

भारत की पवित्र भूमि सदैव संतों, साधुओं और महानायकों की धरोहर रही है। हर कोने में ऐसे पराक्रमी पुरुष और नारियां जन्म लेती रही हैं जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। अंग्रेजी राज के विरुद्ध महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरों ने प्राणों की बाजी लगा दी। आजादी के बाद […]

Read More