बंगाल चुनाव में मालदा कांड: NIA जांच के आदेश, सुप्रीम कोर्ट सख्त-राजनीति भी गरमाई

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बंगाल चुनाव में मालदा कांड:

बंगाल चुनाव:पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई गंभीर घटना ने देश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था दोनों को झकझोर दिया है। भारत का सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है। हालांकि इस फैसले पर कई सवाल भी उठ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

मालदा के मोथाबाड़ी (कालियाचक) इलाके में सात न्यायिक अधिकारियों—चार पुरुष और तीन महिला—को स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। यह घटना दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुई और आधी रात के बाद केंद्रीय बलों के पहुंचने पर खत्म हुई। बताया गया कि अधिकारियों को न तो भोजन दिया गया और न ही बाहर जाने दिया गया। रिहाई के बाद उनके वाहनों पर पत्थर और डंडों से हमला भी किया गया। यह विरोध मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ बताया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने घटना को “न्यायपालिका को डराने की साजिश” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी अदालत का हिस्सा हैं और उनके खिलाफ ऐसा व्यवहार “आपराधिक अवमानना” के दायरे में आता है। कोर्ट ने राज्य प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी सहित कई अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा है।

चुनाव आयोग का एक्शन, NIA को जांच

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी। एजेंसी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी होगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जहां-जहां न्यायिक अधिकारी तैनात हैं, वहां पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बल मुहैया कराए जाएं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रशासनिक विफलता पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि घटना के दौरान प्रशासन “पूरी तरह निष्क्रिय” रहा। हाईकोर्ट के अधिकारियों के SOS संदेशों के बावजूद समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने इस मामले में राज्य प्रशासन की “गंभीर लापरवाही” को उजागर करते हुए कड़ी नाराजगी जताई।

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ममता बनर्जी का पलटवार

इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटना को बीजेपी और चुनाव आयोग की “साजिश” बताया। ममता ने कहा कि अनुभवी स्थानीय अधिकारियों को हटाकर बाहर के अधिकारियों की तैनाती की गई, जो स्थानीय परिस्थितियों को संभालने में विफल रहे। उन्होंने सीधे तौर पर अमित शाह को भी जिम्मेदार ठहराया।

चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव

मालदा की इस घटना ने बंगाल चुनाव के बीच राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। एक ओर न्यायपालिका और चुनाव आयोग सख्त रुख में हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब सबकी नजर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।

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