भारत का तेल भंडार चिंताजनक स्तर पर, सिर्फ 9.5 दिन की जरूरतें ही पूरी करने में सक्षम

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि देश के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार सीमित अवधि तक ही जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ है कि भारत के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार अपनी पूरी क्षमता पर भी केवल लगभग 9.5 दिनों की मांग को पूरा कर सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश के पास करीब 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का लगभग 64 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि वास्तविक स्थिति में उपलब्ध तेल भंडार इससे भी कम समय के लिए पर्याप्त हो सकता है।

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रणनीतिक तेल भंडार किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ये भंडार आपातकालीन स्थितियों में उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि युद्ध, वैश्विक संकट या तेल आपूर्ति में बाधा आने पर। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो। भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व्स की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। इसके तहत इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) का गठन किया गया। वर्तमान में देश में तीन प्रमुख स्थानों पर ये भंडार मौजूद हैं—विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर। इन स्थानों पर कुल मिलाकर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन भंडारण क्षमता विकसित की गई है।

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हालांकि सरकार ने 2021 में इन भंडारों को बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक नई सुविधाएं चालू नहीं हो सकी हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पादुर में नई सुविधाएं विकसित की जानी हैं, जिससे कुल क्षमता में 6.5 मिलियन मीट्रिक टन का इजाफा होगा। यह स्थिति भारत के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए, देश को अपने ऊर्जा भंडारण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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