टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश टीम के बाहर रहने के फैसले ने देश के क्रिकेट जगत में गहरी हलचल पैदा कर दी है। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीम को टूर्नामेंट में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। आधिकारिक तर्क यह था कि भारत में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं थीं, इसलिए यह कदम उठाया गया। लेकिन इस निर्णय के बाद टीम के सीनियर असिस्टेंट कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने खुलकर असहमति जताई है।
सलाहुद्दीन का कहना है कि इस फैसले ने युवा क्रिकेटरों के मनोबल को बुरी तरह प्रभावित किया है। उनके मुताबिक, विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खेलने का सपना खिलाड़ी बचपन से देखते हैं। कई क्रिकेटर वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद इस स्तर तक पहुंचते हैं। ऐसे में अचानक लिया गया निर्णय उनके करियर पर गहरा मानसिक असर डाल सकता है। उन्होंने दावा किया कि टीम के दो खिलाड़ी इस झटके से गंभीर मानसिक तनाव में चले गए थे।
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विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व खेल सलाहकार आसिफ नजरुल के बयान सामने आए। पहले उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट में न खेलने का फैसला सरकार का था, लेकिन बाद में उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों की सहमति से लिया गया। इस पर सलाहुद्दीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि खिलाड़ियों या कोचिंग स्टाफ की राय इस मामले में नहीं ली गई थी। उनके अनुसार, यह फैसला ऊपर से थोपा गया और अब उसकी जिम्मेदारी खिलाड़ियों पर डाली जा रही है।
सलाहुद्दीन ने यह भी कहा कि यदि निर्णय वास्तव में राष्ट्रीय हित में था तो खिलाड़ी त्याग करने को तैयार रहते, लेकिन कम से कम उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था। उनका मानना है कि पारदर्शिता की कमी ने ही विवाद को जन्म दिया। फिलहाल यह मुद्दा बांग्लादेशी क्रिकेट में बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक और खेल संबंधी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
