उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बनी मजारों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। केजीएमयू प्रशासन की ओर से अवैध मजारों पर चस्पा किए गए नोटिस का जवाब देने की अंतिम तारीख 6 फरवरी तय की गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर तय समयसीमा तक मजार कमेटियों की ओर से संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज नहीं दिए गए, तो 6 फरवरी के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
केजीएमयू प्रशासन ने कैंपस के भीतर मौजूद कुल 8 मजारों में से 6 को अवैध मानते हुए नोटिस जारी किया था। इन नोटिसों के जरिए मजार कमेटियों को 15 दिन का समय दिया गया, ताकि वे यह प्रमाणित कर सकें कि ये मजारें विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले की हैं। यह 15 दिन की समयसीमा अब 6 फरवरी को समाप्त हो रही है।
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प्रशासन का कहना है कि नोटिस जारी करने से पहले पूरा मामला अदालत में रखा गया था। अदालत से विश्वविद्यालय के पक्ष में निर्णय आने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, अगर कोई मजार वैध है और उसके ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं, तो उन्हें दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करना होगा।
परिसर में कुल 8 मजारें
केजीएमयू कैंपस में कुल 8 मजारें मौजूद हैं, जिनमें से 6 पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि ये मजारें बिना अनुमति के बनाई गई हैं और विश्वविद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जे की श्रेणी में आती हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
मजार विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों के नेता केजीएमयू परिसर पहुंचकर बीजेपी सरकार पर निशाना साध चुके हैं। वहीं मौलवी फिरंगी मेहंदी ने दावा किया है कि मजारें केजीएमयू से पहले की हैं, जबकि साधु-संतों का कहना है कि अगर ऐसा है तो उसके ठोस सबूत प्रशासन को सौंपे जाने चाहिए।
