मुरादाबाद में अवैध वसूली के आरोपी अधीक्षक पर कब होगी कार्यवाही!

  • मनचाही बैरेक में जाने के बंदियों से वसूली जा रही मोटी रकम
  • मुफ्त में लगने वाली मुलाकात पर्ची के लिए वसूले जा रहे 10 रुपए प्रति मुलाकाती

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। अवैध वसूली में लिप्त मुरादाबाद जेल अधीक्षक पर कब कार्रवाई होगी। यह सवाल विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि मुरादाबाद मंडल के एक राजनैतिक दल के पदाधिकारियों के जेल प्रशासन पर जेल के अंदर बंदियों से की जा रही अवैध वसूली की शिकायत होने के बाद भी कारागार मुख्यालय में बैठे मुखिया समेत अन्य आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। हकीकत यह है कि जेल विभाग के आला अफसर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां उड़ा रहे है।

मिली जानकारी के मुताबिक राजनैतिक दल के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि जेल में बंदियों से प्रतिदिन पांच से सात लाख रुपए की अवैध वसूली कर कमाई की जा रही है। नाम के पहले अक्षर से बैरेक में जाने से बचने के लिए बंदियों को मनचाही बैरेक में जाने के लिए 7000 रुपए की मोटी रकम देने के विवश होना पड़ रहा है। बैठकी और मशक्कत के नाम पर 4000 रुपए वसूल किए जा रहे है। मुलाकात पर्ची के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपए वसूल किए जा रहे है। जबकि नियमानुसार एक पर्ची पर तीन व्यक्ति निःशुल्क मुलाकात कर सकते हैं।

सात जेलों में अभी तक नहीं हुई अधीक्षकों की तैनाती

जेल में बंदियों के कल्याण के नाम पर चल रही कैंटीन अफसरों की कमाई का जरिया बन गई है। कैंटीन की बिक्री में बढ़ाने के लिए जेल में बंदियों को घटिया भोजन परोसा जा रहा है। बंदियों को जो दाल पड़ोसी जा रही है उसमें दाल ढूंढे नहीं मिलती है। रोटियों का तो और ही बुरा हाल हैं। चाय तो ऐसी दी जाती है जिसे जानवर भी देखना पसंद नहीं करते है। कैंटीन में जेल के बाहर आसानी से 15 रुपए में मिलने वाली खाद्य सामग्री को 50 से 60 रुपए में बेचा जा रहा है। जेल में प्रवेश की प्रतिबंधित वस्तुओं की जमकर कालाबाजारी की जा रही है। पान, बीडी, मसाला, सिगरेट, तंबाकू, गांजा, चरस और ब्लेड को अनाप शनाप दामों पर बेचा जा रहा है। इसके बाद भी विभाग के उच्चाधिकारियों ने भ्रष्टाचार के इस गंभीर मसले पर चुप्पी साधकर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके निजी सचिव व्यस्त होने की बात कहकर बात कराने से मन कर दिया।

दोषी अफसरों पर नहीं होती कोई कार्रवाई!

लखनऊ। शासन में सेटिंग गेटिंग कर बांदा से मुरादाबाद जेल पहुंचे अधीक्षक आलोक सिंह ने जेल में लूट मचाना शुरू कर दिया। सूत्रों का कहना है प्रभार संभालने के बाद ही उन्होंने बंदियों से सुविधा देने के नाम पर होने वाली वसूली के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी कर दी। शिकायत के बाद भी इन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी प्रकार बुलंदशहर जेल में महिला जेल अधीक्षक की लूट और मातहत अधिकारियों के हिस्सा हड़पने और चहेते कर्मियों को लगातार कमाऊ जगह पर ड्यूटी लगवाने के बाद भी इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। एआईजी कैंप कार्यालय से पर्चियां भेजकर जेलों से खानपान, सौंदर्य प्रसाधन जैसी तमाम वस्तुएं मंगवाने की भी शिकायत हुई इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

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